एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को गुड गवर्नेंस इन यूनिवर्सिटीज विषय पर बतौर एक्सपर्ट लेक्चर देने आए राज्यपाल राम नाईक के कानूनी सलाहकार एसएस उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों में दी जाने वाली शिक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया। कहा, विश्वविद्यालयों से अच्छे तो कोचिंग संस्थान हैं, जहां से पढ़कर छात्र कुछ काबिल तो बनते हैं। विश्वविद्यालयों में तो शिक्षकों को आपसी झगड़े से ही फुरसत नहीं। वे राजभवन में शिकायतें तो करते रहते हैं लेकिन छात्रों को कॅरियर ओरिएंटेड एजूकेशन देने की फिक्र नहीं रहती। आज उच्च शिक्षा का उद्देश्य डिग्री देकर छात्र से नमस्ते कर लेने भर का रह गया है।
पांचाल संग्रहालय में तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार (टेकिप-3) सेल की तरफ से आयोजित एक्सपर्ट लेक्चर में एसएस उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों के संचालन में गुड गवर्नेंस का महत्व बताया और फिर कमियों को गिनाना शुरू किया। कहा, एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं होता लेकिन वह पूरी ईमानदारी से क्वालिटी एजूकेशन देता है और छात्र कामयाब भी होते हैं। विश्वविद्यालय के शिक्षक ऐसा नहीं करते। कई सालों से पुराना सिलेबस पढ़ाया जा रहा जबकि कोचिंग सेंटरों में हर साल अपडेटेड सिलेबस पढ़ाया जाता है। उन्होंने राजभवन आने वाली शिकायतों पर कहा कि शिक्षक को चालीस पचास पेज की शिकायत करने से ही फुरसत नहीं। उन्होंने विश्वविद्यालय संचालन को लेकर कहा कि मुखिया कुलपति होता है लेकिन वह बाकी समितियों और शिक्षकों के साथ मिलकर ईमानदारी से अपना कार्य करेंगे तभी संस्थान का सही संचालन हो पाएगा। लेक्चर के दौरान डीन आईटी प्रोफेसर एके गुप्ता, लॉ के हेड डॉ. अमित सिंह, डॉ. अशोक, डॉ. विजय बहादुर, प्रोफेसर अभय सिंह, प्रोफेसर एके सरकार, प्रोफेसर पीबी सिंह, कुलसचिव एके अरविंद, वित्त अधिकारी सुरेश उपाध्याय, परीक्षा नियंत्रक महेश कुमार आदि मौजूद रहे।
कुलपति और विधायक ने भी पूछे सवाल
लेक्चर के दौरान कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला और इतिहास विभाग के हेड, फरीदपुर विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल ने भी एसएस उपाध्याय से सवाल पूछे। कुलपति ने सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों के प्रमोशन का मुद्दा भी उठाया। इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक अजय ने पूछा कि विश्वविद्यालय की स्थापना छात्रों के लिए हुई और यहां छात्रों को ही साइड कर दिया जाता है। ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर उपाध्याय का जवाब था कि इसी कारण उच्च शिक्षा का यह हाल है।
छात्रा से छेड़छाड़ का सवाल भी उछला
एलएलएम की छात्राओं ने पिछले दिनों केंद्रीय पुस्तकालय में अपनी एक सहपाठी के साथ हुई छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया। पूछा, यहां की सेंट्रल लाइब्रेरी की तुलना क्या बीएचयू से करना चाहेंगे। सेंट्रल लाइब्रेरी में जाकर उसकी हकीकत देख लीजिए। इसका उपाध्याय ने कोई जवाब नहीं दिया।