खुफिया एजेंसियों की एडवाइजरी के आधार पर जिले के तीन गांवों में कांवड़ियों के जुलूस को शांतिपूर्ण माहौल में निकलवाने की जिम्मेदारी एसडीएम और सीओ को सौंपी गई है। ये तीनों गांव शाही और भोजीपुरा थानों के हैं। जिनमें पिछले दिनों कांवड़ियों को हरिद्वार भेजने के दौरान विवाद हुआ था। सात या आठ अगस्त को लौटते समय गांव में कोई झगड़ा न हो, इसलिए ग्रामीणों को थानों में बुलाकर दोनों समुदाय के लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
थाना शाही के दो हजार की आबादी वाले बुजिया जागीर गांव में इस गांव के कांवड़ियों को विदा करने के लिए गांव के करीब 40-50 लोग मुस्लिम बस्ती से होकर गए थे। जिसको लेकर विवाद हो गया है। जिसे निपटानेे के लिए सोमवार को थाने में दोनों पक्षों के साथ पुलिस और प्रशासन के अफसरों की बैठक में यह सहमति बनी कि एसडीएम जो रूट तय करेंगे वह सभी को मान्य होगा।
एक पक्ष के नन्हें शाह, अयूब, जमाल शाह, बाबू मिस्त्री, हाजी अहमद हुसैन, आरिफ हुसैन, मो. साबिर, अलाउद्दीन इस बात पर अड़े रहे कि कांवड़िए मस्जिद के सामने वाले रास्ते से भविष्य में न आएं-जाएं। मौजूदा प्रधान अशोक कुमार गंगवार, पूर्व प्रधान प्रेमशंकर, डालचंद, उमेश गंगवार, राजकुमार गुप्ता, पातीराम गंगवार, सोमपाल मुखिया, ठाकुरदास आदि ने ओमकार गंगवार के घर के सामने होलिका स्थल के पास वाले रास्ते से कांवड़ियों के आने-जाने का रूट तय करने का सुझाव दिया। इस पर दूसरा पक्ष भी राजी दिखा। तीन घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस-प्रशासन दोनों पक्षों को राजी करने में सफल हो गया कि एसडीएम आरएन पांडेय अगले एक-दो दिन में मौका मुआयना कर कांवड़ियों का स्थायी रूट तय करेंगे।
इसी थाने के बगरऊ के कांवड़िए कांवड़ लेने हरिद्वार गए हैं जो कि सात अगस्त को लकमन होते हुए लौटेंगे। 2012 में उनको गांव से रवाना होते समय मस्जिद के पास रोक दिया था। इस बार भी इसी की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए पुलिस बल और अधिकारी सात अगस्त को मौजूद रहें। तीसरा मामला भोजीपुरा के घुरसमपुर गांव का है, यहां की मिली जुली आबादी में मसजिद के सामने से कांवड़ियों के निकलने के दौरान पिछले साल विवाद हुआ था। बाद में जुलूस के स्थान पर दो-तीन के समूह में कावड़ियों को निकाला गया था। इस बार भी उसी तरह की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया है। एडवाइजरी में उस दौरान पुलिस बल की मौजूदगी पर जोर दिया है।