बरेली। जब शरीर के ओरल कैविटी के किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया, कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूड़ों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्सा आते हैं। इस कैंसर के होने का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। मुंह में लंबे समय तक छाले भी कैंसर की संभावनाएं बढ़ा देता है।
आईएमए सभागार में गुुरुवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रूहेलखंड मेडिकल कॉलेज के कैंसर सर्जन डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती स्टेज में पहचान कर लेने से मरीज बड़े ऑपरेशन से बच सकता है लेकिन यदि यह फैल भी जाए तब परेशानी होती है, लेकिन अब इसका बड़े से बड़ा इलाज भी बरेली में संभव है। कहा कि ओरल कैंसर सबसे ज्यादा पुरुषों में पाया जाता है इसका मुख्य कारण पान, मसाला, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट का प्रयोग करना है एल्कोहल भी इसका कारण है। , तंबाकू में करीब पांच सौ तरीके के हानिकारक तत्व होते हैं जिनमें से 50 ऐसे हैं जिन्हें हम कार्सिनोजन है। संगोष्ठी में आईएम अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल, सचिव डॉ. राजीव गोयल, डॉ. सुदीप सरन, डॉ. अनूप आर्या मौजूद रहे।
ओरल कैंसर के लक्षण
बिना किसी कारण नियमित बुखार आना, गर्दन में किसी तरह की गांठ होना, मुंह में हो रहे छाले या घाव जो कि भर ना रहे हों, जबड़ों से रक्त का आना या जबड़ों में सूजन होना, मुंह का कोई ऐसा क्षेत्र जिसका रंग बदल रहा हो, गालों में लंबे समय तक रहने वाली गांठ, मरीज की आवाज में बदलाव होना, चबाने या निगलने में परेशानी होना,