काला धन सफेद करने में मददगार कुछ ऐसे लोग अब आय कर विभाग के राडार पर आ गए हैं जिनमें से कुछ तो दोे साल तक रिटर्न दाखिल करते थे लेकिन अब नहीं कर रहे हैं और इनमें से कुछ के नाम पर संपत्ति और जेवरात भी खरीदे गए हैं। बरेली मंडल के 2500 लोगों पर शिकंजा कसा गया है।जिले में इनकी संख्या 11 सौ के करीब बतायी जा रही है। इन सभी को नोटिस जारी करके रिटर्न दाखिल न करने का कारण पूछा है। साथ में कुछ बड़ी खरीद का ब्योरा पेश करते हुए पूछा है कि इनको खरीदने के लिए आपके पास इतनी रकम कहां से आई। लोग हैरत में हैं, कि इनकम टैक्स विभाग के पास यह जानकारी कहां से आई है और अब सीए से सलाह ले रहे हैं।
आयकर सर्किल में मंडल के 45 हजार रिटर्न 2011-12 में दाखिल हुए थे, उनमें से 20 फीसदी के रिटर्न ड्राप हो गए। इनके रिटर्न ड्राप होने पर आयकर विभाग भी चुप रहा। इन्हीं में से करीब ढाई हजार लोगों ने जमकर खरीददारी की। आठ नवंबर से लेकर अब तक पांच लाख से अधिक धनराशि जमा की, जिनका चिन्हांकन पेन नंबर और आधार कार्ड के मिलान से हुआ है। उसी में खुलासा हुआ है कि उन्होंने इस अवधि में काफी धनराशि की आरामदायक वस्तुएं, गहने, फर्नीचर, वाहन आदि खरीदने में खर्च की। उनका ब्योरा विभिन्न स्तर से आयकर विभाग ने जुटाया है।
इन मानकों पर पकड़े गए
30 लाख से अधिक की जमीन, मकान, संपत्ति। बैंक में पांच लाख या इससे अधिक जमा। पांच लाख के गहने। दस लाख रुपये शेयर । पांच लाख या इससे अधिक की कार। 50 हजार से अधिक की हवाई यात्रा। विदेश भ्रमण आदि ।
उद्यमियों के ड्राइवर और कर्मचारियों को नोटिस
आयकर विभाग के नोटिस मंडल के दर्जनभर से अधिक उद्यमियों के कारिंदे, नौकर, ड्राइवर और अन्य कर्मचारियों के नाम भी जारी हो गए हैं। ये लोग उद्यमियों के खास रहे हैं और उनके नाम से भी वाहन, संपत्ति आदि की खरीद की गईं थीं। इनके शुरू में रिटर्न दाखिल किए गए थे लेकिन बाद में लापरवाही कर दी गई, अब नोटिस जारी हुए तो अहसास हो रहा है कि रिर्टन दाखिल हो गया होता तो भविष्य में प्रस्तावित जुर्माना राशि से बच जाते।
जनधन वाले बोले हिंदी में दो समन
जनधन वालों ने आयकर अधिकारियों के सामने मुश्किल पैदा कर दी है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को बढ़ावा दे रही है लेकिन समन अंग्रेजी में जारी कर दिए गए हैं। वह कह रहे हैं कि हम अंग्रेजी नहीं जानते हैं, ऐेसे में अंग्रेजी से हिंदी कराने के लिए वकील के पास जाए। वकील समन पढ़ने और उनका जवाब तैयार करने की फीस लेगा। हम लोग इतने पढ़े लिखे और पैसे वाले होते तो जनधन खाता क्यों खुलवाते। ऐसे में हम गरीबों को जवाब देने के लिए दुभाषिए या फिर वकील के माध्यम से समन का जवाब देने की अनुमति प्रदान की जाए। जनधन खाता धारकों के इस तर्क के बाद आयकर अधिकारी भविष्य में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी नोटिस जारी करने का मन बना रहे हैं। इस बारे में आयकर के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है।