फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पकड़ी गई क्लोनिंग.. स्मार्ट मीटर में भी ‘खेल’ मुमकिन

विज्ञापन
बिजली मीटर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन

अलग-अलग घरों में दो बिजली मीटर मगर बिलिंग एक ही कनेक्शन पर

बरेली। पावर कॉरपोरेशन में हावी निजी कंपनियां जो चाहेंगे.. करेंगे की नीति पर काम कर रही हैं। पिछले दिनों जन्माष्टमी पर स्मार्ट मीटर ने गुल खिलाया था, इससे बरेली समेत कई जिलों में लाखों उपभोक्ता प्रभावित हुए थे। त्योहार पर ब्लैक आउट हो गया था। तब से अब तक इसकी जांच चल रही है। विभाग ने नए मीटर लगाने पर भी रोक लगा दी है। इस बीच बरेली में निजी कंपनी द्वारा लगाए गए मीटरों में एक और बड़ी गड़बड़ी मिली है। शहर में दो अलग-अलग स्थानों पर एक ही नंबर के मीटर लगा दिए गए हैं। एक उपभोक्ता को जब कई माह बिल नहीं पहुंचा तो उसने विभाग में चक्कर लगाने शुरू किए तब कहीं बमुश्किल पता चला कि मीटर की क्लोनिंग है।
विज्ञापन

बांस मंडी में रहने वाली शशि देवी के घर पर तीन जनवरी 2020 को नया कनेक्शन दिया गया था जिस पर स्मार्ट मीटर लगाया गया था।कनेक्शन लगने के बाद अगस्त तक तक बिल नहीं पहुंचा तो हैरान-परेशान शशि देवी ने बिजली विभाग के कार्यालय आकर इसकी शिकायत की। जांच-पड़ताल में पता लगा कि शशि देवी का जो कनेक्शन नंबर है, उसकी बिलिंग लगातार हो रही है। इसके बाद बिल न पहुंचने का कारण तलाशा गया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इसी नंबर का एक और मीटर कुंवरपुर जसौली में रहने वाली राजवती के घर में लगा है। दोनों कनेक्शन पर सीलिंग सर्टिफिकेट भी जारी हुए हैं।
इस खुलासे के बाद विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया। सहायक अभियंता मापक आरके निषाद ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी एल एंड टी और ईईएसएल को पत्र लिखा तो कंपनी का स्टाफ मामला रफादफा करने की कोशिश में जुट गया। उन्होंने शशि देवी का मीटर उखाड़ने की अनुमति मांगी लेकिन इस बीच मामला एक्सईएन राजेश शर्मा की जानकारी में पहुंच गया। उन्होंने कंपनी को शशि देवी का मीटर उतारकर विभागीय स्टोर में जमा कराने का निर्देश दिया ताकि आगे कोई जांच हो तो बतौर प्रमाण वह सुरक्षित रहे।

स्मार्ट मीटर यानी स्मार्ट ढंग से बिजली चोरी भी मुमकिन

पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से बिजली चोरी रोकने के लिए हर कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान शुरू किया गया था लेकिन एक ही नंबर के दो स्मार्ट मीटर मिलने के बाद नया खुलासा हुआ कि स्मार्ट मीटर के जरिये और भी स्मार्ट ढंग से बिजली की चोरी हो सकती है। यानी स्मार्ट मीटर में भी ‘खेल’ मुमकिन है। खुद बिजली विभाग के अफसरों का कहना था कि इस घटना से साफ है कि कंपनी एक ही नंबर के चाहे जितने मीटर लगा दे, बिलिंग सिर्फ एक ही कनेक्शन पर होगी और इसका खामियाजा विभाग को भुगतना पड़ेगा। आम पब्लिक को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी सो अलग। बता दें कि स्मार्ट मीटरों के कहीं तेजी से दौड़ने तो कहीं सुस्त चलने की शिकायतें पहले से हैं। लिहाजा यह भी सवाल उठ रहा है कि स्मार्ट मीटर से लोगों को सहूलियत कम मिल रही है, दिक्कतें ज्यादा झेलनी पड़ रही हैं।

दोनों कनेक्शनों पर पिछले साल लगाए गए थे स्मार्ट मीटर

बिजली विभाग ने कुंवरपुर जसौली में राजवती के नाम 19 दिसंबर 2019 को कनेक्शन दिया था। इस पर मीटर नंबर जेड एम 0162418 लगाया गया था। बांसमंडी में शशिदेवी के नाम कनेक्शन तीन जनवरी 2020 को लगा, उस पर भी इसी नंबर का मीटर लगाया गया। इसी कारण बाद में लगे शशि देवी के कनेक्शन पर बिल नहीं आया। अधिकारियों के मुताबिक दोनों कनेक्शनों पर एल एंड टी कंपनी ने ईईएसएल नाम से बने सीलिंग सर्टिफिकेट जारी किए थे।

करोड़ों का खेल.. कंपनियां कमाती हैं और बिजली विभाग गंवाता है

पावर कॉरपोरेशन में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के नाम पर अरबों के घोटाले का अच्छा-खासा इतिहास बन चुका है। इन योजनाओं को जिन कंपनियों के माध्यम से चलाया गया, वे बिजली विभाग को करोड़ों का चूना लगाकर निकल लीं। उपभोक्ताओं के हिस्से में सिर्फ दुश्वारियां आईं। पिछले महीने जन्माष्टमी पर स्मार्ट मीटरों के दगा देने की वजह से ही लाखों उपभोक्ताओं के कनेक्शन अचानक बंद हो गए और कई जिलों में ब्लैक आउट हो गया। बरेली में ही 53 हजार लोगों को अंधेरे में जन्माष्टमी मनानी पड़ी। यह गड़बड़ी दुरुस्त करने में कई दिन लग गए। सरकार ने कार्रवाई के आदेश दिए लेकिन अब तक एसटीएफ की जांच ही पूरी नहीं हो पाई है। विभाग में उच्चस्तर पर इसे भले गंभीरता से न लिया जा रहा हो लेकिन नीचे अफसरों का भी मानना है कि नामीगिरामी कंपनियों ने ठेेके तो हथिया लिए लेकिन जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं। बता दें कि सपा शासन में भी एचसीएल कंपनी पर करोड़ों के बिल माफ करके हेराफेरी करने के आरोप लगे थे मगर इसकी जांच शुरू हुई तो सरकार में बैठे कंपनी के ‘शुभचिंतकों’ ने ही उसे रफादफा करा दिया।

स्मार्ट मीटरों की क्लोनिंग का मामला पहली बार सामने आया है। कंपनी के आग्रह पर एक उपभोक्ता का मीटर उतरवाकर जमा करा दिया है। मामला गंभीर है क्योंकि इससे तमाम सवाल उठ रहे हैं। जिम्मेदार कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।- राजेश शर्मा, एक्सईएन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें