जांच के दौरान खातों में नहीं मिले रुपये, पुलिस की विवेचना जारी
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मेडिकल बनाने वाले जिला अस्पताल के स्टाफ का भी फंसना तय
बरेली। 300 बेड अस्पताल के फर्जी भर्ती प्रकरण में सारा लेनदेन क्लर्क के ड्राइवर बताए जा रहे युवक के दो बैंक खाते में हुआ था। पुलिस ने इन दोनों खातों को सीज करा दिया हैै। फिलहाल इन दोनों खातों में कोई धनराशि जमा नहीं है। दूसरी ओर इस मामले में जिला अस्पताल में एक साथ इतने मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने वाले कर्मचारियों का फंसना भी तय माना जा रहा है।
सोमवार को पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी के मोहल्ला तुलाराम निवासी सोमेश कश्यप समेत तमाम लोगों ने जिला महिला अस्पताल में तैनात बड़े बाबू कुलदीप शर्मा, सीएमओ ऑफिस के बाबू ताहिर के अलावा खुर्रम गौंटिया के बॉबी और विकास यादव के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि वर्ष 2018 में इन चारों ने नए बन रहे 300 बेड अस्पताल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 50 युवकों से तीन-तीन लाख रुपये यानी डेढ़ करोड़ की रकम ठग ली थी। आरोपियों ने पीड़ितों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के साथ ही उन्हें फर्जी नियुक्तिपत्र भी दे दिए थे। ज्वाइनिंग के लिए जाने पर मामला खुल गया।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपियों ने विकास यादव के दो बैंक खातों के जरिये लेनदेन किया था, विकास महिला अस्पताल के बड़े बाबू का ड्राइवर बताया जा रहा है। ये दोनों खाते पुलिस ने सीज करा दिए हैं। जांच में इनमें से एक खाते में 66 रुपये मिले, जबकि दूसरे में बैलेंस जीरो था। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इन खातों में आए रुपये किसे ट्रांसफर किए गए। साथ ही पुलिस इस मामले में जिला अस्पताल में एक साथ करीब 50 लोगों के मेडिकल करने वाले कर्मचारियों की भी मिलीभगत भी मान रही है। ऐसे में मेडिकल करने वाले कर्मचारियों का भी इसमें फंसना तय माना जा रहा है।
एक आरोपी के दो बैंक खाते में रुपये का लेनदेने होने की बात सामने आई है। दोनों खाते सीज करा दिए गए हैं। आगे की जांच अभी जारी है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी