रबड़ फैक्ट्री के कर्मचारियों का बकाया ईपीएफ भुगतान करने के लिए महेंद्रा कोटेक बैंक से 1.32 करोड़ रुपये निकालने का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। जिला प्रशासन के दबाव में बैंक ने ईपीएफ विभाग को जारी ड्राफ्ट सोमवार को रद्द कर दिया। इसके साथ ही जिला प्रशासन डीआरटी (डेब्ट रिकवरी ट्रिब्युनल) जाने की तैयारी में जुट गया है। उधर, ईपीएफ कमिश्नर ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है।
वर्ष1999 में सिंथेटिक एंड केमिकल्स (रबड़ फैक्ट्री) बंद हो गई थी। प्रबंधन ने प्रभावित श्रमिकों का ईपीएफ भुगतान नहीं किया। प्रभावित श्रमिकों को बकाया ईपीएफ राशि दिलाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने एक सितंबर 2017 को डीएम को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि 9.3746 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाईवे के निर्माण में अधिकृत हो गई। इसके बदले मिला 4.22 करोड़ रुपये का मुआवजा विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) और परियोजना निदेशक एनएचएआई के संयुक्त बैंक खाते में जमा है। मंत्री ने लिखा कि सालों से तमाम श्रमिक फैक्ट्री से बकाया ईपीएफ भुगतान के लिए संघर्षरत हैं। इसलिए बैंक में जमा मुआवजे की राशि में से 1.32 करोड़ रुपये ईपीएफ खाते में ट्रांसफर कर दिया जाए। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त बरेली ने भी इससे पहले बकाया ईपीएफ दिलाने का आग्रह किया था।
केंद्रीय मंत्री पत्राचार करते रहे लेकिन प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। पिछले दिनों ईपीएफ कमिश्नर ने भी नोटिस जारी किए तो इसे भी अनदेखा कर दिया गया। तब प्रवर्तन अधिकारी ने महेंद्रा कोटेक बैंक में जमा मुआवजा राशि में से 1.32 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट बकाया ईपीएफ भुगतान के लिए ले लिया। इसकी भनक लगते ही प्रशासन ने बैंक प्रबंधक और ईपीएफ प्रवर्तन अधिकारी पर कोतवाली में गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया, इससे मामला तूल पकड़ गया। ईपीएफ विभाग श्रम, रोजगार मंत्रालय मंत्री संतोष गंगवार देखते हैं। प्रशासन के इस व्यवहार से प्रकरण से मंत्री गंगवार बेहद आहत ही नहीं, नाखुश भी हैं। ईपीएफ अफसर प्रकरण हाईकोर्ट ले जाने की तैयारी में जुटे हैं।