बरेली। शहर से लेकर गांव तक कूड़े से कराह रहे हैं। दुर्गंध के बीच जिंदगी घिसट रही है। जिम्मेदार कागजों पर स्वच्छता का दावा कर रहे हैं। गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर 65 करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर धूल फांक रहे हैं। शहर में लगाए गए कंपोस्टर सड़ रहे हैं। कचरा स्मार्ट सिटी की साख पर बट्टा लगा रहा है। कचरा निस्तारण नहीं होने की वजह से स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग प्रभावित हो रही है, पर जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। अमर उजाला टीम ने इसकी पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। हकीकत बयां करती रिपोर्ट...। ब्यूरो