पीलीभीत। गोवंशीय पशु सड़कों पर न घूमें इसके लिए योगी सरकार आने पर ब्लॉक स्तर पर गोशालाएं बनाई गई थीं। जिले में गोशालाओं में रखे गए पशुओं पर करीब 22 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके गोवंशीय पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। छुट्टा घूमे वाले पशु खेतों पर खड़ी फसलों को उजाड़ रहे हैं, जिससे किसान परेशान हैं। कई पशु लोगों पर हमला कर दे रहे हैं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंशीय पशुओं का कत्ल रोकने के साथ उनके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए थे। छुट्टा घूमने वाले पशुओं को रखने के लिए गोशालाएं बनाई गई थी। इन पशुओं के चारे के लिए सरकार की ओर से प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से दिए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 32 गोशालाएं संचालित है। इनमें 25 हजार से अधिक पशु रखे गए हैं। इन पशुओं पर प्रति माह 22 लाख रुपये से अधिक खर्च खर्च किए जा रहे है। इसके अलावा गोशालाओं में पशुओं की देखभाल को लगाए गए कर्मचारियों के मानदेय पर अलग से खर्च होता है। इतनी मोटी रकम खर्च होने के बावजूद हर इलाके में गोवंशीय पशु सड़कों और खेतों पर घूमते नजर आते हैं। छुट्टा घूमने वाले पशु फसलों और इंसानों के लिए खतरा बन रहे हैं।
एक सप्ताह में दो लोगों की जान ले चुके हैं सांड़
एक सप्ताह में अलग-अलग स्थानों पर दो ग्रामीणों की सांड़ के हमले में जान जा चुकी है। 24 जुलाई को बरखेड़ा थाना क्षेत्र के बर्रामऊ गांव निवासी ट्रैक्टर चालक राधाकृष्ण (35) पर सांड़ ने हमला कर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। 28 जनवरी को गजरौला क्षेत्र के घियोना गांव के कालीचरन (55) पर खेत की रखवाली करते वक्त सांड़ ने हमला किया था। उनकी भी मौत हो गई। इनके अलावा भी कई लोग छुट्टा पशुओं का शिकार बन चुके हैं।
छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान ठप
कोरोना संकट काल से पूर्व छुट्टा पशुओं को गोशाला पहुंचाने के लिए अफसरों ने सख्ती की थी। नगर पालिका, नगर पंचायत की टीमें पशु पालन विभाग के साथ मिलकर छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशाला पहुंचाने में लगी रहती थी। मगर अब छुट्टा पशुओं को लेकर कोई संजीदगी नहीं है।
चारे की मुकम्मल व्यवस्था करने की कोशिश
गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के बीच बदहाल तस्वीर बदलने के लिए अब आय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। हरे चारे की दिक्कत दूर करने को गोशालाओं के पास चारागाह की जमीन पर नैपियर घास उगाई गई है। इसके अलावा गोबर से उत्पाद बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे गोबर से बने गमला, धूपबत्ती आदि बनाकर आय बढ़ाई जा सके।
13 नई गोशालाओं का निर्माण जारी
जिले के 13 नई गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है, जो ग्रामीण इलाकों में बनाई जा रही है। निर्माण पूरा होते ही पशुओं का रखना शुरू हो जाएगा।
जिले में 32 गोशालाएं हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक पशु रखे हैं। चारे के लिए प्रत्येक पशु पर प्रति दिन 30 रुपये के हिसाब से खर्च दिया जाता है। अधिकांश गोशालाओं में क्षमता से अधिक पशु हैं। सड़क पर घूमने वाले पशुओं को आश्रय देने के लिए 13 नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं। निर्माण पूरा होते ही इन गोशालाओं पशु शिफ्ट करा दिए जाएंगे। कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। - डॉ. एके गर्ग, सीवीओ