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डेढ़ साल बाद मुस्कान को मिला ममता का आंचल

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बरेली। मंगलवार को रामपुर के दंपती आकर बाल कल्याण समिति से अपनी बेटी मुस्कान को साथ ले गए। मुस्कान डेढ़ साल से अस्पतालों और संस्थाओं की दया पर पल रही थी। परिवार ने अस्पताल पर बेटे के बदले बेटी देने का आरोप लगाकर उसे छोड़ दिया था। डीएनए जांच ने साबित किया कि वही बच्ची के माता-पिता हैं।
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मिलक (रामपुर) के गांव राजडंडिया निवासी होरीलाल और ममता ने समय से पहले जन्मी अपनी बेटी मुस्कान को छह मई 2019 को बरेली के गुरुनानक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 28 मई को डिस्चार्ज के दौरान दोनों अस्पताल प्रबंधन पर बेटे के बदले बेटी देने का आरोप लगाकर उसे अस्पताल में ही छोड़कर चले गए। इसके बाद बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट डॉ. डीएन शर्मा ने बच्ची को उसका हक दिलाने के लिए पहल की। उनकी कोशिशों से बच्ची को अलग-अलग अस्पतालों में रखा गया, स्वस्थ होने के बाद एक संस्था में भेजा गया जहां उसका नाम मुस्कान रखा गया। फिर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मामला दर्ज कराकर बच्ची और उसके मां-बाप का डीएनए टेस्ट कराया। इसमें पुष्टि हुई कि होरीलाल और ममता ही बच्ची के मां-बाप है।
मंगलवार को होरीलाल और ममता समिति के कार्यालय पहुंचे। यहां अस्पताल के डॉक्टर व उस संस्था के पदाधिकारी भी बुलाए गए थे जहां मुस्कान पल रही थी। होरीलाल और ममता ने सबसे माफी मांगी। कहा, वे भ्रमवश बच्ची को छोड़ गए थे। बच्ची उनकी है और वह अब उसका पूरा ध्यान रखेंगे।
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बच्ची के माता-पिता ने भूल स्वीकार की है। बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है। जब विवाद हुआ था तो मुस्कान सिर्फ सात सौ ग्राम की थी जो अब सात किलो की हो गई है। पुलिस प्रशासन समय-समय पर बच्ची की देखभाल की जानकारी करेगा। - डॉ. डीएन शर्मा, मजिस्ट्रेट बाल कल्याण समिति
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