बरेली। एक जिला एक उत्पाद योजना में जल्द ही स्वर्णकारी और बांस-बेंत हस्तशिल्प कला भी शामिल होगी। उद्योग विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। चीन और मलेशिया आदि देशों में बांस-बेंत से विभिन्न आधुनिक उत्पाद तैयार हो रहे हैं। बरेली जिला बांस, बेंत फर्नीचर के लिए भी जाना है, इसलिए इन दोनोेेें हस्तशिल्पों तो प्रोत्साहित करने की तैयारी है। इसका स्लाइड शो लखनऊ से आ रहे शासन के दूत के सामने दिखाया जाएगा। इसके अलावा स्वर्णकारी का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) में बरेली का उत्पाद सिर्फ जरी जरदोजी ही है। इसलिए ओडीओपी योजना को विस्तारित कर अन्य स्थानीय हस्तशिल्प शामिल किए जाएंगे। क्योंकि पिछले दिनों केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने स्वर्णकार और बेंत-बांस हस्तशिल्प शामिल करने को कहा है। कपड़ा मंत्री बनने के बाद उन्होंने स्वर्णकारों को जरी कारीगरों की तरह हस्तशिल्पी कार्ड बनवाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अब प्रदेश सरकार से ओडीओपी में स्वर्णकार और बेंत-बांस हस्तशिल्प भी शामिल कराने का आग्रह किया है। इससे बरेली जिला में दो उत्पाद पंजीकृत हो जाएंगे। इस बीच उद्योग विभाग ने भी दोनों हस्तशिल्प शामिल करने की कवायद तेज कर दी है। शासन से नवनीत सहगल 21 नवंबर को बरेली आ रहे हैं। उद्योग विभाग शासन के दूत के सामने बेंत-बांस हस्तशिल्प और जनपद में इसकी संभावनाओं पर तैयार एक स्लाइड शो प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
एक जनपद एक उत्पाद योजना में बेंत-बांस हस्तशिल्प शामिल किया जाना है। बांस उद्योग मलेशिया, चीन आदि देशों में खूब पनप रहा है। आधुनिक तकनीक स्थानीय स्तर पर विकसित करने संबंधी एक स्लाइड शो भी नोडल अफसर के समक्ष पेश करने की तैयारी है। इसके अलावा स्वर्णकारी का भी प्रस्ताव भेजा गया है।
- आरआर गोयल, संयुक्त आयुक्त उद्योग