बरेली। दुर्गम भौगोलिक हालात के बीच नक्सलियों से मोर्चा ले रहे बीएसएफ के जवान सबसे ज्यादा टेंशन में हैं तो इस वजह से कि बीएसएफ की बटालियन में रह रहे उनके परिवार बंदरों के हमले का शिकार न बन जाएं। भिटौरा में बीएसएफ की दोनों बटालियन में बंदरों का इस कदर आतंक है कि अब इस अर्द्धसैनिक बल के अफसरों ने इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखकर मदद मांगी है। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात करके भी बीएसएफ अफसरों ने बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया है।
बंदरों के आतंक से सिर्फ आम लोग ही नहीं हैं बल्कि बीएसएफ जवानों के परिवार भी बुरी तरह आतंकित हैं। शहर से 20 किलोमीटर दूर भिटौरा में बीएसफ की दो बटालियन हैं जहां नक्सलप्रभावित कांकेर जिला (छत्तीसगढ़) में तैनात तमाम बीएसएफ जवानों के परिवार रह रहे हैं। कई बीएसएफ जवान भारत-पाक सीमा पर भी तैनात हैं। अफसरों के मुताबिक दुर्गम परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी को अंजाम देने वाले जवानों और उनके परिवारों में बंदरों का बेहद आतंक है। बीएसएफ ने बंदरों के आतंक से छुुटकारा दिलाने के लिए तीन महीने पहले जिला प्रशासन से मदद मांगी थी लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वन विभाग ने भी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया जिसकी वजह से बंदरों की तादाद के साथ उनका आतंक भी बढ़ता जा रहा है।
बीएसएफ ने डीएम को एक बार फिर पत्र लिखकर अवगत कराया है कि भिटौरा कैंप परिसर में बंदरों की धमाचौकड़ी से जवानों के परिवारों का रहना मुश्किल हो गया है। तमाम लोगों को बंदर काटकर घायल कर चुके हैं। हालत यह है कि रोजमर्रा के कामों के लिए भी घर से निकलना मुश्किल है। एक तरीके से पूरे कैंप परिसर पर ही बंदरों के कब्जे जैसे हालात हैं। अक्सर बंदर घरों में घुसकर भी अच्छा-खासा नुकसान कर देते हैं। बीएसएफ कैंप से आए अधिकारियों ने एडीएम सिटी से भी मुलाकात करके इस समस्या से अवगत कराया।
शहर में भी कम नहीं हुआ आतंक
शहर में भी एक बड़ी आबादी बंदरों के आतंक से प्रभावित है। नगर निगम में हर तीसरी शिकायत बंदरों के आतंक से ही संबंधित होती है। शुक्रवार शाम पवन विहार में बंदरों ने छत पर उन्हें भगाने आए बिंदु प्रसाद पर हमला कर दिया, जिससे छत से गिरकर उनका हाथ टूट गया था। एनएल गंगवार की पत्नी ने छत पर गेहूं सूखाने पहुंची तो उन्हें भी काट लिया। लोगों में नगर निगम अधिकारियोें के खिलाफ काफी गुस्सा भी है। पुराना शहर, जगतपुर, बिहारी पुर, हरूनगला, ग्रीन पार्क, गुलाबनगर, चाहबाई, हरुनगला, ग्रीन पार्क आदि इलाकों में भी बंदरों का जबरदस्त आतंक हैं। लोगों का कहना है कि बंदर किचन और फ्रिज में रखा सामान तक निकालकर भाग जाते हैं। धूप में सूख रहे कपड़े ले जाना तो बेहद आम बात है।
शहर से बंदर पकड़ने में सबसे बड़ी बाधा वन विभाग अधिकारी हैं। दिन रात शहर में बंदरों के झुंड ऊधम कर रहे हैं, लोग परेशान हैं। वन विभाग के असहयोग की वजह से बंदर पकड़ने के लिए टेंडर भी नहीं हो पा रहे हैं। टेंडर हो जाएं तो बीएसएफ कैंप में फैले आतंक पर भी काबू पाया जा सकता है। - उमेश गौतम, मेयर