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कोषागार के सुधार को लेकर भड़के थे सुरेश खन्ना

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बरेली। जिला कोेषागार प्रशासन किसी की नहीं सुनता, भले ही वित्तमंत्री क्यों न हों। पिछले माह वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने अचानक छापा मारा था तो कोषागार में गंदगी और अन्य अव्यवस्थाएं देखकर भड़क गए थे। उन्होंने मंडल मुख्यालय के कोषागार की रंगाई, सफाई और मरम्मत आदि के लिए आकस्मिक निरीक्षण के दो दिन बाद ही आठ लाख रुपये का बजट जारी कर दिया, लेकिन स्थिति यह है कि अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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कोषागार कार्यालय विवादों का अड्डा बनता जा रहा है। कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार और लूटखसोट को लेकर कुछ माह पहले नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार और सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने विजिलेंस जांच के लिए लिखा था। इसके बाद कैबिनेट में फेरबदल हुई तो सुरेश खन्ना वित्तमंत्री बन गए। वह पिछले माह 17 तारीख को जब बरेली पहुंचे तो पुरानी शिकायतों को देखते हुए अचानक जिला कोषागार पर छापा मारा। वहां पहुंचने से पहले डीएम को सूचित किया था, लेकिन तत्कालीन डीएम ने फोन रिसीव नहीं किया, इससे खन्ना की नाराजगी ज्यादा बढ़ गई। कोषागार पहुंचे वित्तमंत्री ने पूरे स्टाफ की परेड कराई और उपस्थिति का सत्यापन कराया। कार्यालय परिसर, कंप्यूटर और दीवारों पर जाले लगे देख वह भन्ना गए। उन्होंने अफसरों से गंदगी की ओर इशारा कर पूछा तो वे बगले झांकने लगे। करीब पौने घंटे तक मंत्री कलक्ट्रेट परिसर में रहे लेकिन एक भी प्रशासनिक अफसर मौके पर नहीं पहुंचा था।
निरीक्षण के अगले दिन करीब बीस घंटे बाद सुबह दस बजे तत्कालीन डीएम ने वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से फोन बात कर माफी मांगी। इस पर मंत्री ने कोषागार में फैली गंदगी और अव्यवस्था दूर करने के निर्देश दिए। मंत्री ने डीएम से कोषागार कार्यालय परिसर को संवारने और अव्यवस्थाएं दूर करने के लिए प्रस्ताव मांगा। डीएम ने जैसे ही प्रस्ताव दिया, तुरंत वित्तमंत्री ने आठ लाख रुपये का बजट जारी करा दिया, लेकिन करीब 25 दिन बीतने पर भी कोषागार में संबंधित एक भी कार्य शुरू नहीं हुआ है। अफसर शासन से आवंटित बजट दबाए बैठे हैं। इसी बीच नए डीएम के आने से कोषागार प्रशासन और मौज मस्ती में आ गया है।
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