राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की पहल पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने टीबी मुक्त भारत बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय में फार्मेसी विभाग के शिक्षकों ने डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया है। इसकी मदद से विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्रों एवं अफसर तक 90 टीबीग्रस्त बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल कर रहे हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने आयोजन में शामिल सभी समर्थ लोगों से एक-एक टीबीग्रस्त बच्चे को गोद लेकर उसकी देखभाल करने की अपील की थी।
राज्यपाल की पहल पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय में फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफसर डॉ. अमित वर्मा ने सोशल साइट्स फेसबुक, ट्वीटर और व्हाटसऐप के जरिये ‘जीरो टीबी एडॉप्ट पेशेंट’ नाम से प्लेटफार्म तैयार किया है। इसके जरिये समाज के समर्थ लोगों एवं अफसरों को एक-एक बच्चे को गोद लेने की अपील की जा रही है। फार्म भरने के बाद लोगों की सहमति मिल जाती है तो उनके साथ टीबीग्रस्त बच्चे की जानकारी साझा की जाती है और फिर वे उसकी देखभाल करते हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल, कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय समेत 90 लोग अब तक इतने ही टीबीग्रस्त बच्चे गोद ले चुके हैं। डॉ. अमित वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में जागरूकता कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं।