बरेली। डांवांडोल हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौतियों से जूझ रही केंद्र सरकार अब देश के हर नागरिक के समय को आर्थिक उत्पादन की कसौटी पर कसने की कवायद में जुट गई है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय यानी नेशनल स्टेटिस्टिकल ऑफिस के जरिये कराए जा रहे सर्वे में आंकलन किया जा रहा है कि समय के अनुपात में देश के लोगों का ंमौद्रिक योगदान क्या है। सर्वे करने वाली टीमों को लोगों के हर आधे घंटे के उन क्रियाकलापों का ब्योरा जुटाने को कहा गया है जिनके जरिये वे आय अर्जित करते हैं। महिलाओं की गतिविधियों पर सर्वे में खास फोकस किया गया है।
सर्वे में प्राप्त आंकड़ों का सरकार क्या उपयोग करेगी, यह बहुत साफ नहीं है लेकिन सर्वे का नेतृत्व कर रहे अफसरों का कहना है कि केंद्र सरकार का मकसद इसके आधार पर सकल घरेलू उत्पादकता को बढ़ाने और नए स्रोतों की तलाश करने का है। इसी कारण आम आदमी के वैतनिक और अवैतनिक कार्यों के साथ घरेलू कार्यों, अध्ययन-अध्यापक, सामाजिक गतिविधियों के अलावा खाली समय के क्रियाकलापों की सूचनाएं भी इस सर्वे में जुटाई जानी हैं। नेशनल स्टेटिस्टिकल ऑफिस बरेली के ज्वाइंट डायरेक्टर सुस्मित कुमार के मुताबिक आम तौर पर लोग आर्थिक क्रियाकलापों से ज्यादा समय गैर आर्थिक कार्यों में व्यतीत करते है। यानी उनका ज्यादा समय आर्थिक उत्पादन के तौर पर व्यर्थ होता है। सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से इस समय का महत्व जरूर होता है। महिलाओं का अधिकतर समय घरेलू कामों में खर्च होता है जिससे किसी तरह का मौद्रिक योगदान नहीं होता। उन्होंने बताया कि सर्वे के आंकड़ों के आधार पर संवेदनशील लैंगिक नीतियों के निर्धारण में भी मदद मिलेगी।
यह भी देखेंगे
शासन-समाज के बारे में क्या विचार दिन के कामों में क्या-क्या शुमार
लोगोें की मानसिकता और मनोविज्ञान जानने की भी कोशिश की जा रही है। सर्वे में लोगों से ये सवाल भी पूछे जाने हैं कि वे किस तरह के सामान का इस्तेमाल करते हैं। शासन, समाज और धर्म के संबंध में किन विचारों से प्रभावित हैं और इसकी वजह से उनकी दिनचर्या में क्या प्रभाव पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इससे उनके श्रम के वर्गीकरण में मदद मिलेगी मसलन उनका श्रम स्थायी या अस्थायी है या फिर सीजनल। अफसरों का कहना है कि इस सर्वेक्षण के आधार पर गरीबी के आंकलन, मूल्य सूचकांक निर्माण, घरेलू उपयोग व्यय के पैटर्न और स्तर, विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्यांकन, रोजगार-बेरोजगारी की स्थिति, कृषि परिवारों की स्थिति और प्रवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग आदि के लिए नीति निर्धारण का कार्य किया जाएगा।
सवालों का जवाब देने को तैयार नहीं
लोग, सही आंकड़े मिलना मुश्किल
सर्वे में पूछे जाने वाले ज्यादातर सवाल ऐसे हैं जिनका लोग जवाब देने को तैयार नहीं हैं। मुस्लिम बहुल पुराना शहर में सर्वे करने गई टीमों को तो लगभग खाली हाथ लौटना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद अफसरों का दावा है कि सर्वे दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा और रिपोर्ट भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को भेज दी जाएगी। हालांकि यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि सर्वे में पर्याप्त संख्या में लोगों के शामिल न होने से इस रिपोर्ट में भेजे जाने वाले आंकड़े कितने दुरुस्त होंगे।
दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक सर्वे को पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सर्वे करने में काफी परेशानी भी पेश आ रही है। लोग अपनी दिनचर्या और दैनिक क्रियाकलापों की जानकारी देने में कतरा रहे हैं। हालांकि फिर भी सर्वे समय से पूरा कर लिया जाएगा। - सुस्मित कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर नेशनल स्टेटिस्टिकल आफिस