बरेली। जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा का पिछली बार 26 सितंबर का दौरा काफी हंगामेदार रहा था। अटके प्रोजेक्टों की समीक्षा में सबसे ज्यादा निशाने पर सेतु निगम, नगर निगम, ऊर्जा निगम सहित कई सरकारी विभाग रहे थे। मंत्री ने उस समय एक महीने बाद यानी 26 अक्तूबर को फिर आने की बात कहते हुए अफसरों को निर्देश दिए थे कि इससे पहले जो निर्देश दिए गए हैं, उनका अनुपालन हो जाए। अब मंत्री के संभावित दौरे को लेकर सरकारी महकमों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि प्रभारी मंत्री के आने की कोई अधिकृत सूचना अभी नहीं आई है, लेकिन उनका प्रोग्राम कहीं अचानक न आ जाए, इस डर से दिवाली पर अफसर घर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री, प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने 26 सितंबर को समीक्षा बैठक में इस पर नाराजगी जाहिर की थी कि सेतु निगम के प्रोजेक्ट बगैर प्लानिंग और संबंधित विभागों से समन्वय के ही शुरू हो गए हैं। नतीजतन, चौपुला, आईवीआरआई, लालफाटक, सेटेलाइट सहित दूसरे पुलों के काम किसी न किसी अड़ंगे की वजह से पूरे नहीं हो पा रहे हैं। विकास के इन अटके प्रोजेक्ट से पब्लिक को परेशानी होने के साथ सरकारी रकम का भी नुकसान हो रहा है। प्रभारी मंत्री ने नगर निगम, ऊर्जा निगम, मनरेगा, बेसिक शिक्षा सहित कई विभागों में भी गड़बड़ी और घोटाले के मामलों के जांच के आदेश दिए थे। प्रभारी मंत्री का कहना था कि एक माह बाद 26 अक्तूबर को वह फिर आकर यह समीक्षा करेंगे कि उनके निर्देशों का कितना अनुपालन हुआ है। इसकी समय सीमा गुजरने के साथ प्रभारी मंत्री के दौरे की सरकारी तंत्र मेें सुगबुगाहट फिर से शुरू हो गई है। इसे लेकर अफसरों में इतनी बेचैनी देखी जा रही है कि वे अभी दिवाली पर घर जाने से भी करता रहे हैं।