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कान्हा में फिर 30 गायों की मौत! मेयर बोले- निगम के अफसर जल्लाद

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बरेली/सीबीगंज। गायों की हिफाजत न कर पाने पर महाराजगंज के डीएम और एसडीएम के साथ पांच अफसरों निलंबित होने के अगले ही दिन अचानक कान्हा पशु आश्रय गृह पहुंचे मेयर उमेश गौतम ने यहां गायों की मौत पर नगर निगम अफसरों की घेराबंदी कर दी। कान्हा का निरीक्षण करने के बाद मेयर ने मीडिया के लोगों को बुलाकर आश्रय गृह और उसके आसपास कई गायों के शव और कंकाल पड़े दिखाए। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों के ही अंदर कान्हा में 30 गायों की भूख-प्यास से मौत हो गई है लेकिन नगर निगम के अफसर बेपरवाह बने बैठे हैं। उन्होंने नगर निगम के अफसरों को जल्लाद बताते हुए कहा कि वे इस मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेज रहे हैं। उधर, नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने कहा है कि कान्हा में सिर्फ एक बछड़े की मौत हुई है।
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मेयर उमेश गौतम मंगलवार दोपहर करीब एक बजे अचानक कान्हा पहुंचे। इससे पहले सुबह ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी यहां निरीक्षण करके लौटे थे। कुछ ही देर बाद मेयर ने फोन करके यहां मीडिया के लोगों को बुला लिया। मीडिया वालों को उन्होंने चार गायों की मृत देह इधर-उधर पड़ी हुई दिखाई। इनमें से दो की तो आंखें तक चील-कौवे नोंच ले गए। एक और शव कई दिन पुराना पड़ा हुआ था और काफी सड़ चुका था। इसके बावजूद कान्हा से उसे हटाया नहीं गया था। कान्हा परिसर में ही गायों की हड्डियां और कंकाल भी पड़े हुए थे। एक बछड़े की मौत मंगलवार को सुबह ही हुई थी। मेयर ने मीडिया वालों को बताया कि कान्हा में गायें भूख-प्यास से मर रही हैं। यहां करीब छह सौ पशु हैं जिनके लिए रोजाना करीब 12 क्विंटल चारे की जरूरत है लेकिन इसके बावजूद पिछले 20 दिनों में यहां सिर्फ 10 क्विंटल चारा ही आया है।
कई बार मांगीं दवाएं पर नहीं मिलीं
मीडिया वालों के सामने ही मेयर ने कान्हा के संचालक से पूछताछ की तो उसने बताया कि भुगतान न मिलने की वजह से चारे की व्यवस्था करने में दिक्कत हो रही है। पशुओं के इलाज के लिए आने वाले डॉक्टरों ने कान्हा के चिकित्सा रजिस्टर में कई बार दवाइयां पूरी न होने के संबंध में लिखा था लेकिन फिर भी वहां दवाइयां नहीं पहुंचाई गईं। संचालक ने बताया कि इसकी वजह से बीमार गायों को इलाज नहीं मिल पा रहा है और उनकी मौत हो रही है। छह गाय बीमार भी मिलीं।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी आए, फिर भी खबर नहीं ली
मेयर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान को भी बुला लिया। उनके सामने ही कर्मचारियों ने बताया कि संजीव प्रधान सुबह निरीक्षण करने आए लेकिन उन्होंने मृत गायों की जानकारी नहीं ली। उपवन में दर्ज आंकड़ों के अनुसार 15 दिन में लगभग 30 गायों की मौत हो चुकी है। मेयर ने बताया कि पिछले नौ महीने में यहां छह सौ गायों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गड़बड़ियों की रिपोर्ट वह मुख्यमंत्री को भेज रहे हैं। उन्होंने सारी गड़बड़ियों के लिए नगर निगम के अफसरों को जिम्मेदार बताया है।
नौ महीने में छह सौ गायें मर गईं
कान्हा में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही थी। मंगलवार को निरीक्षण किया तो तमाम गड़बड़ियां मिलीं। दो गायों के कंकाल पड़े थे। कई हड्डियां पड़ी थीं। जो शव पड़े थे उनकी हालत बेहद खराब थी। एक की जीभ कटी थी तो दूसरे की आंखें गायब थी। यह देखकर मेरी रूह कांप गई। नौ माह में 600 से ज्यादा गाय यहां मर चुकी हैं। अक्तूबर में ही 30 गायों की मौत हुई। चारा और चोकर तक नहीं दिया जा रहा। इसके लिए नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी साफ तौर पर दोषी हैं। कान्हा की जिम्मेदारी प्रशासन के जिन अफसरों पर है, वे भी दोषी हैं। पिछली बार भी खामियों की सीएम को शिकायत भेजी थी लेकिन अफसरों ने उन्हें गुमराह कर दिया, इसलिए इस बार मीडिया को बुलाकर गायों की दुर्दशा दिखाई है। -उमेश गौतम, मेयर
सिर्फ एक बछड़े की हुई मौत
नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने मंगलवार सुबह ही कान्हा का निरीक्षण किया था। उसके बाद मेयर निरीक्षण के लिए पहुंचे। एक बछड़ा सोमवार को बीमार था, मंगलवार को उसी की मौत हुई है। कान्हा के बेहतर संचालन के लिए संचालक को 53 लाख का भुगतान किया जा चुका है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी और पशु चिकित्सक से रिपोर्ट भी मांगी है। अगर गोवंश को चारा और बीमार होने पर इलाज नहीं मिल पा रहा तो संचालक पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। खामियों के संबंध में डीएम और दूसरे अधिकारियों को भी अवगत कराया है। -सैमुअल पॉल एन, नगर आयुक्त
प्लॉट पर कब्जे की रिपोर्ट तो इसीलिए ‘कान्हा’ पर चोट
मंगलवार की शाम को नगर निगम में यह भी चर्चा फैली कि महानगर कॉलोनी के सामने शेरपुर गांव में नगर निगम की साढ़े तीन करोड़ की जमीन को कब्जामुक्त कराए जाने के बाद यह रार शुरू हुई है। मेयर के कई महीनों बाद अचानक कान्हा पहुंचकर नगर निगम के अफसरों पर हमला करने के पीछे भी यही निहितार्थ बताए गए। दरअसल मेयर और नगर आयुक्त के बीच कई महीनों तक टकराव चला था। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ तमाम वार किए जाने के बाद कमिश्नर ने समझौता कराया था। करीब दो महीने सब ठीकठाक चलने के बाद हाल ही में निगम के प्लॉट पर कब्जे को लेकर फिर दोनों के संबंधों में खटास शुरू हो गई।
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