बरेली। लगातार टूटते-दरकते दिल्ली-लखनऊ हाईवे के अधूरे काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के सामने विधायकों ने खस्ताहाल हाईवे पर आए दिन होने वाले हादसों में मौतें होने का मामला उठाया था। इसके बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने तेजी दिखाई और इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए बुधवार को दिल्ली हेडक्वार्टर पर तकनीकी टेंडर पड़े। इसमें तीन कंपनियां पास हुई हैं। दो-तीन दिन में इस काम के लिए फाइनेंस बिड भी खुलेगी। इसमें जिस कंपनी का सबसे कम लागत का टेंडर होगा, उसे काम सौंप दिया जाएगा।
करीब 2200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी आधा-अधूरा छोड़कर फरार हो गई थी। लावारिस हुआ यह हाईवे लगातार टूट और दरक रहा था। कई जगहों पर खतरनाक खड्ड और खस्ताहाल फ्लाईओवर से एक्सीडेंट हो रहे थे। हाल में उत्तराखंड के एक मंत्री के बेटे, आयकर अधिकारी सहित कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। 26 सितंबर को प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के सामने भी विधायकों ने खतरे की घंटी बन चुके इस हाईवे का मुद्दा उठाया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने इस हाईवे के बरेली से सीतापुर तक 157 किलोमीटर लंबे हिस्से को बनाने के लिए 7.67 अरब के काम के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बुधवार को एनएचएआई के दिल्ली मुख्यालय पर इस काम के लिए तकनीकी निविदाओं में चार कंपनियों ने टेंडर डाले थे। जांच के बाद तीन कंपनियों को पास कर दिया है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि दो से तीन दिन के अंदर वित्तीय निविदाएं भी आमंत्रित की जाएंगी। इसमें यह तीन कंपनियों में जिसका टेंडर सबसे कम लागत का होगा, उसे ठेका दे दिया जाएगा। बताते हैं कि इस माह यह कंपनी काम शुरू कर देगी और सालभर के अंदर पूरा प्रोजेक्ट पूरा किया जाना है।
एनएचएआई से शासन ने पूछा परियोजना का हाल
एनएचएआई के अधिकारियों से शासन ने हाईवे की परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की जानकारी ली। इसके लिए एनएचएआई के पीडी एनपी सिंह जरूरी रिकार्ड के साथ लखनऊ पहुंचे और उन्होंने उच्चाधिकारियों को परियोजनाओं को पूरा करने में आ रही अड़चनों के बारे में भी अवगत कराया।
लखनऊ हाईवे के अधूरे प्रोजक्ट को पूरा करने के लिए दिल्ली में तकनीकी टेंडर पड़ चुके हैं। जल्द ही वित्तीय टेंडर पड़ने के साथ ही कंपनी को काम सौंप दिया जाएगा। यह काम इसी माह से शुरू कराने की कोशिश की जा रही है।
-एनपी सिंह, परियोजना अधिकारी, एनएचएआई