बरेली। बरेली-सितारगंज के अधूरे काम को किसी दूसरी कंपनी से पूरा कराने के लिए 200 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एनएचएआई ने वर्ष 2014 में वीआईएल नाम की जिस कंपनी को ठेका था, वह सालभर से काम नहीं कर रही थी। इससे यहां आए दिन एक्सीडेंट भी हो रहे थे। एनएचएआई ने इस कंपनी से काम छीनने के साथ करीब 30 करोड़ की जमानत जब्त की कार्रवाई शुरू कर दी है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि इस हाईवे के अधूरे काम का एस्टीमेट तैयार कर लिया है। इसका दूसरे ठेकेदार को काम जल्द देने की जानकारी दी जा रही है।
बरेली से पीलीभीत होते हुए सितारगंज तक हाईवे को चौड़ा करने के लिए एनएचएआई ने वीआईएल नाम की कंपनी को करीब 305 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। कंपनी ने इस काम को पूरा करने में लापरवाही दिखाई। आधी-अधूरी रोड और पुलिया के निर्माण छोड़ देने से हाईवे पर आए दिन हादसे हो रहे थे। कंपनी के करीब सालभर से काम न करने पर यह हाईवे बद से बदतर हो चुका है। एनएचएआई के अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय काफी पहले ही भेज दी थी। उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद वीआईएल से इस प्रोजेक्ट को छीन लिया गया है। इसके साथ ही उसके 30 करोड़ की राशि जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। एनएचएआई के अधिकारियों ने इस काम को पूरा करने के लिए सर्वे के बाद करीब 200 करोड़ का इस्टीमेट तैयार किया है। अधिकारियों का कहना है कि करीब 74 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर अधूरी सड़क, पुलिया कामों के लिए इस बजट की स्वीकृति दिल्ली मुख्यालय से मांगी गई है। बाद में टेंडर की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा।
बरेली-सितारगंज हाईवे का काम काफी समय से ठप पड़ा था। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी थी। वीआईएल से काम छीनने के बाद बाकी काम को पूरा करने का सर्वे कर दो सौ करोड़ का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। इसका टेंडर जल्द कराने की तैयारी चल रही है।
-एनपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई