सोत को मिले पुनर्जीवन तो बने बात
लोगों ने कहा- सोत नदी की खुदाई होना बेहद जरूरी, तभी होगा किसानों का भला
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बिसौली से जनपद की सीमा में प्रवेश करने वाली सोत नदी जैसे-जैसे सूखी वैसे-वैसे उस पर कब्जे होते गए। किसी ने इस पर खेती शुरू कर दी तो किसी ने अवैध निर्माण करा लिया।
बिसौली से बिल्सी, बदायूं और दातागंज होते हुए शाहजहांपुर में प्रवेश करने वाली सोत नदी अब विलुप्त हो चुकी है। अमर उजाला द्वारा इसके पुनर्जीवन के लिए अभियान शुरू करनेे के बाद लोग कहने लगे हैं कि सोत को पुनर्जीवन मिल जाए तो किसानों को तो इसका लाभ मिलेगा ही, आमजन भी इससे लाभांवित होंगे।
सोत नदी का अपना एक अलग ही इतिहास है। इस नदी के अपने खुद के स्त्रोत हुआ करते थे, जिसकी वजह से इसका पानी हमेशा साफ और स्वच्छ हुआ करता था। नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों के लिए कभी भी पानी की कमी नहीं थी। जब भी जरूरत पड़ती थी, नदी से खेतों में सिंचाईं कर लिया करते थे, साथ ही सोत नदी में बहते पानी की वजह से हमेशा खेतों में नमी भी रहती थी, लेकिन यहां पर कुछ लोगों की निगाहें ऐसी पड़ीं कि सोत नदी के स्त्रोत बिल्कुल ही बंद हो गए, जिसकी वजह से इसका पानी सूख गया। ऐसे में नदी किनारे खेती करने वालों किसानों पर खेतों की सिंचाई करने के लिए भी अतिरिक्त बोझ पड़ना शुरू हो गया। वहीं सोत नदी के किनारे लगने वाले मेले भी लगभग खत्म हो गए। इसको लेकर लोगों ने जिला प्रशासन से सोत नदी के पुनर्जीवन के लिए दोबारा इसकी खुदाई कराने की मांग की है। लोगों का कहना है अगर जिले में सोत नदी दोबारा से जीवित हो जाती है, तो इसका फायदा जिले के हजारों किसानों को मिलेगा, वहीं जिले में वाटर लेवल पर भी इसका फर्क नजर आएगा।
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‘सोत नदी को मिले पुनर्जीवन तो बने बात’
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जिले में वैसे भी वाटर लेवल लगातार घटता जा रहा है, जिसकी वजह से आने वाली पीढ़ी को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन को चाहिए वह सोत नदी के पुनर्जीवन के लिए प्रयास करे।
-राम सेठी, दुर्गा कॉलोनी
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सोतनदी का दोबारा मूल धारा में लौटना बेहद जरूरी है, इससे जहां किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी, वहीं उस क्षेत्र में वाटर लेवल भी अच्छा हो जाएगा, जिसकी जिले में बेहद जरूरत है।
-विशाल गुप्ता, गांधी ग्राउंड
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सोत नदी सूख जाने से हजारों किसानों को परेशानी हुई हैं, इसका सबसे ज्यादा असर नदी किनारे खेती करने वाले किसानों पर पड़ा है। वहीं सोत नदी के सूखने से इस पर कब्जे ज्यादा होने शुरू हो गए।
-रूपेंद्र सिंह पटेल, सिविल लाइन
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जिले में सोत नदी की दोबारा से खुदाई कराई जाए, ताकि इसको पुनर्जीवन मिल सके। इसके लिए प्रशासन को पहल करने की बेहद जरूरत है, ताकि सोत नदी अपने पुराने स्वरूप में आ सके।
-आनंद, नेकपुर