बरेली। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर सेटेलाइट फ्लाईओवर को पीलीभीत रोड से जोड़ने की मंजूरी मिले न मिले लेकिन प्रशासन के बाद सेतु निगम के अफसर भी यह संदेश देने में जुटे हुए हैं कि केंद्रीय मंत्री की मंशा को पूरा करने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। हालत यह है कि पीलीभीत रोड पर पुल को मंजूरी मिलने से पहले ही सेतु निगम ने नगर निगम, पॉवर कॉरपोरेशन और बीएसएनएल को पीलीभीत रोड पर बिजली-टेलीफोन की लाइनों के साथ पानी की पाइप लाइन को भी शिफ्ट करने के लिए चिट्ठी भेज दी है।
सेटेलाइट फ्लाईओवर बरेली-शाहजहांपुर रोड पर बनना स्वीकृत हुआ था। कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुल के डिजाइन में बदलाव करते हुए उसकी एक लेन पीलीभीत रोड पर भी उतारने का आग्रह किया था। हालांकि शासन ने अब तक केंद्रीय मंत्री के पत्र पर कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन इसके बावजूद पहले प्रशासन के अफसरों ने सेतु निगम को यह चिट्ठी लिख दी कि केंद्रीय मंत्री की मंशा के अनुरूप पुल का नया डिजाइन तैयार किया जाए और सेतु निगम अधिकारियों ने भी इस पर कागजी घोड़े दौड़ाने शुरू कर दिए। सेतु निगम के डीपीएम बीके सेन ने पॉवर कारपोरेशन के एक्सईएन को केंद्रीय मंत्री की मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी का हवाला देते हुए लिखा है कि पीलीभीत रोड की तरफ पुल की एक लेन बनाने के लिए बिजली की 132 केवीए की हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने की जरूरत पड़ेगी। डीपीएम ने बिजली अफसरों से इसके लिए सर्वे कर डीपीआर देने को कहा है। बीएसएनएल और नगर निगम को भी पत्र भेजा है जिसमें अंडरग्राउंड केबिल, सीवर और पानी की पाइप लाइन को शिफ्ट करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह तैयारी इसलिए की जा रही है ताकि शासन से स्वीकृति मिलते ही फौरन निर्माण शुरू कराया जा सके।
डिजाइन बनाने से पहले ही लिख दीं चिट्ठियां
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने मुख्यमंत्री को पत्र जरूर लिखा है लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से इसका अभी कोई जवाब नहीं आया है। शासन से कोई संकेत न मिलने की वजह से सेतु निगम ने भी प्रशासन के आदेश के बावजूद पीलीभीत रोड पर पुल बनाने के लिए अभी तक कोई डिजाइन तैयार नहीं की है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम, पॉवर कॉरपोरेशन और बीएसएनएल के जीएम को लिखे पत्र में पाइप लाइन, हाईटेंशन लाइन और बिजली के पोल बगैरह पुल की डिजाइन के आड़े आने की बात कहते हुए उन्हें हटाने को कहा गया है।
डिजाइन बदलने पर प्रभारी मंत्री उठा चुके हैं सवाल
सेटेलाइट पुल का डिजाइन बदलने की कवायद पर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं लेकिन न प्रशासन और न सेतु निगम के अफसर इसका जवाब देने को तैयार हैं। दरअसल कहा जा रहा है कि सेटेलाइट से निकलने वाली पीलीभीत रोड 60-70 मीटर तक चौड़ी है, अगर इस पर भी जाम लगने से रोकने में अफसर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं तो सिर्फ साढ़े सात मीटर चौड़ा पुल बनाने से कैसे जाम रुकेगा। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पिछले दिनों साफ-साफ कहा था कि डिजाइन में रद्दोबदल सिर्फ सरकारी रकम की लूटपाट के लिए होती है। हाल ही में पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर भी कमिश्नर को पत्र लिखकर आगाह कर चुके हैं कि अगर पीलीभीत रोड पर भी पुल की लेन उतारी गई तो जाम और ज्यादा लगेगा और हालात भयावह हो जाएंगे।