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साहब मांगेंगे पांच महीने का हिसाब तो क्या देंगे जवाब

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बरेली। पांच महीने बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद फिर कलक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार का दौरा करने वाले हैं और इससे स्टाफ में खलबली मची हुई है। दरअसल पिछले दौरे के वक्त कमिश्नर ने यहां रखे पुराने और कटे-फटे रिकॉर्ड को सहेजने के लिए उसकी जिल्दबंदी कराने का निर्देश दिया था लेकिन स्टाफ ने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब दोबारा उनके निरीक्षण का कार्यक्रम तय होने के बाद ठेका देकर इस रिकॉर्ड की जिल्दबंदी कराने की तैयारी की जा रही है। सहायक भू-लेखाधिकारी को इसके लिए बजट का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।
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राजस्व अभिलेखागार में चकबंदी विभाग के रिकार्डों की हालत काफी खराब है। काफी समय से रिकार्डों के बस्ते और उनकी जिल्दों को दुरुस्त न कराए जाने से महत्वपूर्ण अभिलेखों के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है। पुराने रिकार्डों के पन्ने फट जाने से चकबंदी की जमीनों का ब्योरा देखने में भी अक्सर दिक्कत होती है। अब कमिश्नर का दौरा तय होने के बाद जिल्दों की बाइंडिंग और बस्तों को बदलने का काम ठेके पर देने की तैयारी चल रही है। राजस्व अभिलेखागार के प्रभारी अधिकारी ने इस संबंध में कलक्ट्रेट के सहायक भू-लेखाधिकारी को चिट्ठी भेजी है। इसमें बताया गया है कि जीर्णशीर्ण बस्ते बदलने के लिए उत्तर प्रदेश हथकरघा निगम लिमिटेड कानपुर कुटेशन मय जीएसटी के 76 रुपये प्रति बस्ता निर्धारित की गई है। साथ ही पटवारी फंड में जिन 1121 खस्ताहाल चकबंदी की जिल्दों की बाइंडिंग की जानी है, उनका कुटेशन भी जीएसटी सहित 148 रुपये निर्धारित किया गया है। रिकार्ड रूम प्रभारी ने यह काम शीघ्र शुरू कराने के लिए सहायक भू-लेखाधिकारी से बजट उपलब्ध कराने को कहा है।
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