बरेली। करीब 50 साल पहले डॉ. हरबंस सिंह नाम का एक युवा नेत्र चिकित्सक सीतापुर नेत्र चिकित्सालय की आधारशिला रखने वाले पद्मभूषण डॉ. महेश प्रसाद मेहरे के संपर्क में आया और कुछ सालों के इस संसर्ग के दौरान उसके मन में सामाजिक सरोकारों के प्रति जो भावनाएं पैदा हुईं, वह आज तक फीकी नहीं पड़ीं। पांच दशक से ज्यादा समय गुजरने के बाद परिणति यह है कि अब हरबंस सिंह अब अपने करीब 20 करोड़ कीमत के शहीद भगत सिंह नेत्र चिकित्सालय और उसकी एडवांस्ड विंग को गरीबों की सेवा के लिए समर्पित करने जा रहे हैं। 28 सितंबर को इस चिकित्सालय का चित्रकूट के श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट में विलय हो जाएगा जो यहां गरीबों को बेहद रियायती दरों पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
ग्रीन पार्क में रहने वाले डॉ. हरबंस सिंह ने महानगर के सामने बन्नूवाल कॉलोनी में दस साल पहले पांच सौ गज जमीन पर शहीद भगत सिंह नेत्र चिकित्सालय की बुनियाद रखी थी। वक्त के साथ यह अस्पताल तरक्की करता गया। 2017 में उन्होंने इस चिकित्सालय को रिमॉडल कर इसके साथ एडवांस्ड विंग बनाने की योजना पर काम शुरू किया। नेत्र चिकित्सा के आधुनिक उपकरणों से लैस इस अस्पताल की कीमत फिलहाल 20 करोड़ से ज्यादा है। यूं तो डॉ. हरबंस सिंह ने भी शुरू से ही इस अस्पताल को चैरिटेबल तौर पर चलाया, लेकिन एडवांस्ड विंग बनाने के बाद उन्होंने इसे पूरी तरह गरीबों की सेवा के लिए समर्पित करने का फैसला किया और इसके लिए किसी बेहतर संस्था की तलाश भी शुरू कर दी।
डॉ. सिंह के मुताबिक अपना संकल्प पूरा कराने के लिए उन्होंने कई नेत्र चिकित्सालयों से संपर्क किया लेकिन संतुष्टि नहीं मिली। एक साल की कोशिशों के बाद पिछले साल श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट ने अस्पताल चलाने की हामी भरी। संघ के ट्रस्टी और निदेशक डॉ. बीके जैन के साथ विलय का करार हुआ और इसके बाद एडवांस्ड विंग के लोकार्पण के लिए 28 सितंबर की तारीख भी पक्की हो गई। विलय होते ही अस्पताल को चलाने की जिम्मेदारी ट्रस्ट के हाथों में आ जाएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि मरीजों की तादाद बढ़ने पर 2017 में उन्होंने बन्नूवाल कॉलोनी में ही चंद कदम की दूरी पर एक हजार गज जमीन पर शहीद भगत सिंह नेत्र चिकित्सालय बनाया जिसका उद्घाटन पिछले साल हुआ था। एडवांस्ड विंग के साथ यह पूरा अस्पताल श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट को सौंपा जाएगा।
एडवांस्ड विंग में मिलेंगी ये सुविधाएं
एडवांस्ड मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, फेको इमलसीफिकेशन ऑपरेशन, फोल्डेबल टोरिक लेंस, समलवायु क्लीनिक, हम्फ्री आटोपैरामीटर, अप्लानेशन टोनोमीटर, याग लेजर, रेटिना क्लीनिक, फंडस कैमेरा, ऑक्युलर कोरेहेट टोपाग्राफी, बाल नेत्र क्लीनिक (भेंगापन, इन्फेक्शन, मोतियाबिंद) आदि सुविधाएं मिलेगी।
ये है चिकित्सालय की प्रॉपर्टी
पांच सौ गज में बने अस्पताल में ग्राउंड समेत तीन फ्लोर हैं। ओपीडी में रोज सौ मरीजों की जांच और ओटी में चार मरीजों का ऑपरेशन हो सकता है। वहीं, एक हजार गज में बने चैरिटेबल विंग में बेसमेंट, ग्राउंड समेत चार फ्लोर हैं। इस विंग में सौ बेड हैं और तीन ओटी में छह मरीजों का एक साथ ऑपरेशन हो सकता है।
दस साल काम किया पद्मश्री डॉ. मेहरे के साथ
डॉ. हरबंस सिंह ने बताया कि 1967 से 77 तक उन्होंने सीतापुर स्थित सीतापुर आई हॉस्पिटल में काम किया। उसी दौरान सीतापुर आई हॉस्पिटल के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. महेश प्रसाद मेहरे के संपर्क में आने से उनके अंदर उन्हीं की तरह सामाजिक सरोकारों के प्रति भावनाएं जगीं। 1977 में उन्होंने सीतापुर अस्पताल छोड़ने के बाद बरेली के सिविल लाइंस में किराए के भवन में शहीद भगत सिंह नेत्र चिकित्सालय बनाकर चिकित्सा शुरू की। कुछ सालों बाद मरीजों की संख्या बढ़ी तो बन्नूवाल नगर में अस्पताल बना लिया।
नेत्र चिकित्सा में श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट बड़ा नाम
श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के तहत सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय की स्थापना चित्रकूट में 1968 में हुई थी। यह चिकित्सालय उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आधुनिक तकनीक से नेत्र रोगियों का इलाज कर रहा है। 2018-19 में अस्पताल में दस लाख से ज्यादा मरीजों के आंखों की जांच और 1.32 लाख मरीजों की आंखों का सफल ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड इस अस्पताल के नाम है।