बरेली। पीडब्ल्यूडी दफ्तर पहुंचे कमिश्नर रणवीर प्रसाद यह देखकर नाराज हो गए है कि रिकॉर्ड देखकर यह पता नहीं सकते हैं कि कब और किस सड़क का नवीनीकरण होना बाकी है या फिर उसकी मरम्मत कब-कब कराई गई है। सड़कों का गड़बड़ रिकार्ड देखकर उन्होंने यह भी पूछा कि अगर कोई रोड नवीनीकरण से पहले ही खराब हो जाती है तो उसकी मरम्मत कैसे होती है। इस पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बोले, इसके लिए शासन को हर साल स्पेशल फंड की डिमांड जाती है।
पीडब्ल्यूडी के कामों की समीक्षा के दौरान कमिश्नर इस पर नाराज हुए कि शहर में बोर्ड न लगे होने से यह पता ही नहीं चल पता है कि कौन सी रोड पीडब्ल्यूडी की है और उसकी लंबाई कितनी है। उन्होंने चीफ इंजीनियर प्रमेश गुप्ता को निर्देशित किया कि सर्वे कराकर पीडब्ल्यूडी इसको चिह्नित करते हुए जगह-जगह पर माइल स्टोन भी लगवाए। कमिश्नर ने सड़कों के स्टीमेट बनाने में यह गड़बड़ी पकड़ी कि पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर रोड का लागत का प्रस्ताव वक्त यह स्पष्ट नहीं करते है कि उन्होंने किन विभागीय आदेश के तहत इसे तैयार किया है। इससे तमाम खामियां रह जाती हैं। इसलिए प्रत्येक स्टीमेट के साथ ही उससे संबंधित विभागीय आदेश की कॉपी भी लगाई जाए। कमिश्नर को यह भी मिला कि पीडब्ल्यूडी में मुख्य जिला सड़क, अन्य जिला सड़क, ग्रामीण सड़क सहित अन्य मार्गों का रिकार्ड भी सही से नहीं रखा गया है। इससे यह पता नहीं लग पा रहा था कि किसी श्रेणी की कौन सी सड़क कहां है। इस मौके पर एक्सईएन प्रांतीय खंड हरबंश सिंह आदि कई अधिकारी मौजूद रहे।