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साहब! प्लास्टिक-गिलास-प्लेट के चक्कर में चाय नाश्ते से भी गए

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बरेली। शासन ने सरकारी बैठक और आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और थर्मोकोल से बनी क्राकरी आदि पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही मिनरल वाटर बोतलें भी कार्यक्रमों से आउट हाेंगी। इसके साथ ही बैठकों के बीच होने वाले जलपान-खानपान आदि पर भी रोक लगा दी गई है।
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हाल ही में कार्यभार संभालने वाले मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने सभी विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त और डीएम को पत्र लिखकर कहा है कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्लास्टिक और थर्मोकोल का इस्तेमाल रोकना जरूरी है। क्योंकि इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं जन स्वास्थ्य और पशुओं के लिए भी घातक है। कई बार प्लास्टिक और थर्मोकोल का उत्पादन और प्रयोग पर रोक लगाने के लिए शासनादेश भी जारी हुए हैं। इसलिए अब शासन ने इसी क्रम में नई व्यवस्था कर दी है।
मुख्य सचिव तिवारी ने तीन सितंबर को निर्देश जारी कर कहा है कि शासन ने तय किया है कि किसी सरकारी बैठक में प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने प्लेट, गिलास, चम्मच, प्लास्टिक बोतल पानी आदि का प्रयोग नहीं होगा। इसके स्थान पर स्टील और कांच की क्राकरी ही प्रयोग होगी और पानी स्टील/कांच गिलास में दिया जाएगा। शासन ने बैठकों के बीच होने वाले चाय, नाश्ता, खानपान और जलपान आदि पर भी रोक लगा दी है। शासन ने कहा है कि बैठक से पहले या बाद में इसकी व्यवस्था की जा सकती है। मुख्य सचिव तिवारी ने निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। शासन से जारी निर्देश और नई व्यवस्था से विभागों में अफरातफरी मची हुई है। क्योंकि इसके खानपान पर खूब खर्च होता था। साथ ही हर कोई अफसर पूरी बोतल खोल कर खराब कर देता था, क्योंकि पानी कम ही इस्तेमाल होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
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