बरेली। प्रधानमंत्री मोदी ऐसी बीमा योजनाएं चलाना चाहते हैं जिसमें कम प्रीमियम देकर गरीब किसानों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले लेकिन सरकारी सिस्टम उनकी मंशा को पूरा नहीं होने दे रहा। सदर तहसील में कमिश्नर रणवीर प्रसाद खुद इसके गवाह बने। पता चला कि ज्यादातर लेखपालों ने यह कहकर किसानों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के लिए पात्र मानने से इनकार कर दिया कि यह योजना सिर्फ भूमिहीन किसानों के लिए है। लेखपालों की इस मनमानी से तमाम किसान प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने लेखपालों की यह मनमानी सामने आने के बाद जिले के सभी एसडीएम को अपने इलाकों में इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर रणवीर प्रसाद एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय, एसडीएम, तहसीलदार व प्रधान अवनीश कुमार सिंह के साथ महेशपुर ठाकुरान का दौरा करने पहुंचे थे। गांव कई किसानों ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का लाभ न मिलने की शिकायत अधिकारियों से की थी। कमिश्नर ने लेखपालों से योजना की पात्रता को लेकर पूछा तो जानकर हैरान रह गए कि लेखपाल केवल भूमिहीन किसानों को इस स्कीम में शामिल कर रहे हैं जबकि शासनादेश में कुल मिलाकर 46 प्रकार के व्यवसायों को चिह्नित किया गया है जिन्हें इस योजना में शामिल किया जा सकता है। कमिश्नर ने यह भी पाया कि इसे लेकर लोगों को लाभ दिलाना तो दूर इसकी कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है। कमिश्नर ने एडीएम वित्त को निर्देशित किया कि वे सभी एसडीएम और तहसीलदार के साथ लेखपालों को बुलाकर इसकी प्लानिंग तैयार करें।
योजना के ये हैं मानक
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का सालाना प्रीमियम 330 रुपये है। योजना में 18-50 साल तक की उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं। योजना में ग्राहक को 55 साल की उम्र तक लाभ मिलता है। पॉलिसी का समय पूरा होने से पहले ही अगर बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो उसके उत्तराधिकारी को दो लाख रुपये तक की रकम दी जाती है। योजना का सालाना प्रीमियम 12 रुपये है, जो सीधे बीमाधारक के बैंक खाते से कटता है। अगर बीमाधारक आंशिक तौर से दिव्यांग हो जाता है तो उसे एक लाख रुपये देने का प्रावधान है। सरकारी व निजी दोनों ही बीमा कंपनियां इस प्लान को बेचती हैं।