बरेली। भरपूर खाना खाने और खेल कूद के बाद भी बच्चे की सेहत सुधरने के बजाय बिगड़ रही है तो संभव है पोषक आहार पेट के कीड़े ‘हजम’ कर रहे हों। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 80 प्रतिशत बच्चे पेट के कीडे़े के संक्रमण से ग्रसित है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने डीएम और सीएमओ को पत्र जारी कर 29 अगस्त को कृमि मुक्ति दिवस के तौर पर मनाने के निर्देश दिए हैं। जिले के 15.60 लाख बच्चों को पेट के कीड़े निकालने की दवा पिलाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मेंद्र के मुताबिक कृमि संक्रमण से 1 से 17 वर्ष तक के बच्चे और किशोर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इससे उनका शारीरिक और बौद्धिक विकास बाधित होने की आशंका होती है। पोषण और हीमोग्लोबीन स्तर भी प्रभावित होता है। भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 76 प्रतिशत बच्चे कृमि संक्त्रस्मण के शिकार हैं। इसे देखते हुए शासन ने वर्ष में दो बार कृमि मुक्ति कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है। अभियान के दौरान अगर कोई दवा खाने से छूट जाएगा तो ‘मॉप अप वीक’ में दवा खिलाई जाएगी। नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्र, सरकारी और निजी स्कूल, आईटीआई, केंद्रीय विद्यालय और नर्सिंग स्टूडेंट्स, मदरसा, पॉलिटेक्निक के स्टूडेंट्स समेत जिले के 15.60 लाख बच्चों को पेट के कीड़े निकालने की गोली अल्बेंडोजोल खिलाई जाएगी।
घर नहीं ले जा सकेंगे दवा
निदेशक ने सख्त हिदायत दी है कि किसी को भी दवा घर ले जाने के लिए न दी जाए। बच्चों और किशोरों को अध्यापक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने गोली खिलाएं। जो बच्चे बीमार हैं, या पहले से कृमि नाशक दवा का सेवन कर रहे हों, उन्हें ये दवा नहीं खिलाने के निर्देश हैं।
ये बनाई गई है टीम
अपर शोध अधिकारी पीएस आनंद के मुताबिक दवा पिलाने के लिए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, अधीक्षक, बीपीएम, सीडीपीओ, बीईओ, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा नामित प्रभारी, मदरसा के प्रतिनिधि, एडीओ के प्रतिनिधि समेत आईटीआई, पॉलिटेक्निक, नर्र्सिंग स्टाफ को दवा खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है।