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योगी जी! ये पूछिए बाकी गायें अब तक जिंदा हैं कैसे

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बरेली। गोवंशीय पशुओं की देखरेख को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवरों से वाकिफ नगर निगम के अफसर ही नहीं, प्रशासन के अफसर कान्हा उपवन में गोवंशीय पशुओं की मौत का मामला दबाने में जुट गए हैं। हालांकि अब मेयर ही नहीं बाकरगंज में रहने वाले लोग भी चीख-चीखकर कह रहे हैं कि बाकरगंज ट्रंचिंग ग्राउंड पर कूड़े के विशाल ढेर में एक अर्से से मृत पशुओं को दफनाया जा रहा है, अब कान्हा में मरने वाली गायें भी यहीं दफनाई जा रही हैं। इन लोगों का कहना है कि उनके विरोध की वजह से कई बार तो नगर निगम की टीम पुलिस को साथ लेकर यहां गोवंशीय पशुओं के शव दफन करने पहुंचती है।
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बाकरगंज के लोगों ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी कूड़े के वाहनों में ही मृत पशुओं के शव लेकर आते हैं और उन्हें कूड़े के ढेर में दबाकर चले जाते हैं। कई बार उन लोगों ने अपनी आंखों से यह सब देखा है। मृत पशुओं के शव सड़ने से पूरे इलाके में सड़ांध फैलती है इसलिए वे लोग यहां शव दफनाने का विरोध भी कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद नगर निगम का स्टाफ लगातार यहां शव दफनाता आ रहा है। ये शव सड़ते हैं तो हवा के साथ दूर-दूर तक बदबू जाती है। इन दिनों बरसात का मौसम होने की वजह से हालात और भी ज्यादा खराब हो गए हैं। उनका यहां रहना मुश्किल हो गया है।
बता दें कि मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के एक-दूसरे के खिलाफ खिंची तलवारें म्यान में वापस रखने से पहले मेयर ने कान्हा उपवन में लापरवाही और देखरेख की कमी की वजह से फरवरी से अब तक सवा सौ से ज्यादा गायों की मौत होने का खुलासा किया था। मेयर ने ही यह कहा था कि इन गायों को शासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए बेहद अपवित्रता के साथ बाकरगंज के कूड़े के ढेरों में दफनाया जा रहा है। इससे हिंदू धर्म की आस्थाएं भी आहत हो रही हैं। नगर निगम के अफसर मेयर के आरोपों को गलत करार देने में लगे हैं। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. कान्हा उपवन के संचालक संजीव गौड़ को नोटिस देकर यह चेतावनी भी दे चुके हैं कि गायों की मौत पर जिम्मेदारी उनकी होगी। इस बीच बृहस्पतिवार को समाज सेवा मंच ने भी डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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सड़क पर एक-एक फुट दलदल
बाकरगंज में सफाई न होने और नाला चोक होने से जलभराव के बीच वाहन गुजरने से मुख्य सड़क पर एक-एक फुट दलदल हो गई है। इसके चलते लोगों को यहां से निकलने में दिक्कत हो रही है। साथ ही, सड़क टूटने से इसमें गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं।

पुलिस के डर से नहीं बोलते लोग
बाकरगंज में कूड़ा डालने के विरोध को लेकर कई साल पहले काफी विवाद हुआ था। तब नगर निगम ने यहां पीएसी लगाकर कूड़ा डलवाया था और लोगों के विरोध करने पर लाठीचार्ज भी हुआ। साथ ही इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई और मुकदमा अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इसके चलते शुक्रवार को भी तमाम लोग इस मुकदमे का हवाला देकर बोलने से बचते नजर आए।

अपनी आंखों से देखा है गायों को दफनाते
नगर निगम वाले दिन और रात दोनों ही समय कूड़े के वाहनों में गाय और मरे हुए जानवर लाकर कूड़े के ढेर में दफना जाते हैं। लगातार ऐसा हो रहा है, मैंने कई बार खुद देखा है।
- अच्छी बी, बाकरगंज

नगर निगम वाले मरे हुए जानवर यहां अक्सर दफना जाते हैं। उसमें गाय समेत सभी जानवर होते हैं। लोग विरोध करते हैं इसलिए कई बार पुलिस को साथ लेकर भी आते हैं।
- मो. आरिफ, बाकरगंज
मेरी दुकान के सामने ही ट्रंचिंग ग्राउंड पर ट्रालियां चढ़ती हैं। यहां कूड़े में गाय, भैंस समेत तमाम जानवर दफन किए जाते हैं। मेरे सामने से ही निकलने के कारण देखता रहता हूं।
- मो. हफीज, बाकरगंज

बाकरगंज के लोगों की जिंदगी नारकीय हो गई है। कान्हा में गायों की मौत हो रही है और नगर निगम बाकरगंज में गायों को दफन कर रहा है, इसको लेकर डीएम को ज्ञापन भी दिया है।
- नदीम शमसी, समाज सेवा मंच

हमने तो मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत कर दी है कि कान्हा में गोवंशीय पशुओं की मौत होने के बाद उन्हें बाकरगंज में कूड़े के ढेर में दफनाया जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए ताकि नगर निगम के अधिकारियों की गलतबयानी पर सारी असलियत सामने आ सके। - उमेश गौतम, मेयर

नगर आयुक्त हर दिन कान्हा का निरीक्षण करने आ रहे हैं। गोवंश की मौत होने के बाद हम नगर निगम को सूचना देते हैं और वहां के कर्मचारी आकर मृत जानवरों को उठा ले जाते हैं। अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों की है।- आचार्य संजीव गौड़, कान्हा उपवन संचालक

वाह साहब! नगर निगम का स्टाफ ले जाता है मृत गायें और आपको कुछ पता नहीं
बरेली। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन की ओर से दावा किया गया था कि कान्हा में हुई गोवंशीय पशुओं की मौतों की नगर निगम को खबर नहीं दी गई। उन्होंने बृहस्पतिवार को कान्हा के संचालक आचार्य संजीव गौड़ को एक नोटिस जारी करके भी यही बात कही थी। इस नोटिस में यह चेतावनी भी दी गई थी कि अगर खराब व्यवस्थाओं की वजह से कान्हा में किसी पशु की मौत हुई तो इसके लिए उन्हें जवाबदेह माना जाएगा। इस पर कान्हा के संचालक ने कहा कि है कि वह एक-एक गोवंशीय पशु की मौत की सूचना नगर निगम को भेजते हैं। इसका पूरा ब्योरा उनके रजिस्टर पर दर्ज है। सूचना मिलने के बाद ही नगर निगम का स्टाफ कान्हा उपवन आकर मृत पशुओं के शव ले जाता है। इन शवों की कहां और कैसे अंत्येष्टि की जाती है, इसका उन्हें कुछ पता नहीं है। संजीव गौड़ का कहना है कि मृत पशुओं के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी नगर निगम के स्टाफ की ही है, इसलिए वह इसमें कोई दखलंदाजी भी नहीं करते हैं। उधर, गोवंशीय पशुओं की मौतों पर मचे घमासान के बीच नगर आयुक्त ने शुक्रवार को भी निगम अफसरों के साथ कान्हा उपवन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन शेड जल्दी पूरे करने और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
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