बरेली। पोर्टेबल शॉप प्रकरण की अधूरी जांच की फाइल को कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने कलक्ट्रेट से मंगवाकर अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है। इस प्रकरण की सबसे पहले जांच सिटी मजिस्ट्रेट ने की थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर नगर आयुक्त ने व्यापारी नेता दर्शन लाल भाटिया और पार्षद विनोद सैनी पर एफआईआर दर्ज करा दी थी। इस पर व्यापार मंडल की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद डीएम ने एडीएम सिटी को जांच का आदेश दिया था। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता तीन व्यापारी नेताओं के बयान भी लिए थे, जिसके बाद से यह फाइल कलक्ट्रेट में ही डंप पड़ी थी।
इंदिरा मार्केट में पोर्टेबल शॉप प्रकरण की सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की जांच में नियम विरुद्ध शॉप रखवाने और आवंटन के लिए वेंडरों से एक-एक लाख की वसूली की बात सामने आई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन के आदेश पर पार्षद विनोद सैनी और व्यापारी नेता दर्शनलाल भाटिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। तीन जून को व्यापार मंडल ने डीएम से मिलकर सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट को गलत बताया था। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का दावा था कि उनके संगठन के मंडल अध्यक्ष दर्शनलाल भाटिया का इस प्रकरण से कोई वास्ता नहीं है। डूडा के सत्यापन के बाद ही वेंडरों की लिस्ट बनी थी। नगर निगम ने पोर्टेबल शॉप को किसी ठेकेदार से बनवाकर आवंटित की थीं। व्यापार मंडल के कहने पर डीएम ने एडीएम सिटी को दोबारा जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
इस मामले में एडीएम सिटी महेंद्र कुमार व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री व महानगर अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय संयुक्त महामंत्री संजीव चांदना और महानगर महामंत्री राजेश जसोरिया के लिखित बयान भी ले चुके हैं। इसके अलावा एडीएम सिटी ने नगर निगम और डूडा से भी इस मामले में रिकार्ड मंगवा लिए थे, लेकिन इसकी जांच पूरी नहीं हो सकी। शासन के आदेश के बावजूद इस प्रकरण में जांच में हो रही देरी को देखतेे हुए कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने कलक्ट्रेट से इस प्रकरण की पत्रावलियां मंगवा ली हैं। बताते हैं कि इसी आधार पर शासन को भी रिपोर्ट बनाकर भेजी जा रही है।
इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जानी थी, इसलिए सभी संबंधित पत्रावलियों को मंगवाया था। जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद शासन को इसकी स्थिति से अवगत करा दिया जाएगा।
-रणवीर प्रसाद, कमिश्नर