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भारतीय संविधान बनाने में खीरी ने भी दिया था योगदान

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बांकेगंज। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण में जिले का विशेष योगदान रहा है। यहां के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बंशीधर मिश्र संविधान सभा के सदस्य रहे। उन्होंने संविधान बनाते समय कई महत्वपूर्ण सुझाव देकर उन्हें संविधान में शामिल कराया। इसके अलावा वह चार बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य और एक बार वनमंत्री रहे।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जिले के योगदान पर शोध करने वाले डॉ. रामपाल सिंह बताते हैं कि शाहजहांपुर जिले के पुवायां कस्बे में जन्मे पंडित बंशीधर मिश्र की जन्मभूमि भले ही पुवायां रही हो लेकिन उनकी कर्मभूमि जिला खीरी ही रही। 1926 में लखीमपुर आते ही उन्होंने जिले में स्वतंत्रता संग्राम की कमान संभाल ली। उन्होंने यहां आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क साधा और उन्हें आंदोलन के साथ जोड़ने का प्रयास किया। स्वतंत्रता संग्राम में वे कई बार जेल गए लेकिन आजादी को लेकर उनके कदम न थके न ही रुके।
स्वतंत्रता आंदोलनों में बढ़-चढ़कर की भागेदारी
असहयोग आंदोलन के दौरान 1927 में डेढ़ साल की कैद और 100 रुपये जुर्माना हुआ। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान 1932-33 में एक वर्ष की कैद 200 रुपये जुर्माने की सजा हुई। व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में एक वर्ष की कैद और 20 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में गिरफ्तार हुए उन्हें 29 माह नजरबंद रहना पड़ा। वर्ष 1928 में विलोबी मेमोरियल हॉल में पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में हुई राजनैतिक कांफ्रेंस को सफल बनाने में पंडित बंशीधर मिश्र ने अपनी जान लगा दी। आजादी के पहले 1937 में जब पहली बार विधानसभा गठित हुई तो वे विधानसभा सदस्य बने। इसके बाद 1946 में वह विधानसभा सदस्य रहे। आाजादी के बाद 1962, 1967 और 1969 में विधायक चुने गए। 1969 में वह प्रदेश सरकार में वनमंत्री भी रहे।
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संविधान निर्माण में निभाई भूमिका
आजादी के बाद जब 1946 में संविधान सभा गठित हुई तो 211 सदस्यों की कमेटी में बंशीधर मिश्र को भी संविधान सभा का सदस्य बनाया गया। संविधान बनने के दौरान उनके कई प्रस्तावों को भारतीय संविधान में जगह दी गई।
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