केंद्रों के बंद होने की एक वजह समय से दवाओं की सप्लाई न मिलना भी
- जन औषधि केंद्रों की लिस्ट में 800 से अधिक जेनेरिक दवाएं, पर आधी दवाएं भी नहीं मंगा रहे संचालक
बरेली। सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने वाले जन औषधि केंद्र बिक्री के अभाव में घाटे में चल रहे हैं। चार केंद्रों पर पहले ही ताला लटक चुका है, बाकी केंद्रों के संचालक भी ब्रिकी न होने के चलते परेशान हैं। ब्रिकी न होने की वजह से अधिकांश संचालक लिस्ट में आधी से ज्यादा दवाओं को मंगा ही नहीं रहे। वहीं केंद्रों के बंद होने की एक वजह समय से दवाओं की सप्लाई न मिलना भी बताई जा रही है।
महंगी दवाएं खरीदने में असमर्थ गरीबों के लिए जन औषधि केंद्र खोले गए, लेकिन अब यह केंद्र संकट में हैं। खोले गए बीस केंद्रों में चार पर ताला लटक चुका है। गांव देहात में खुले केंद्रों को छोड़ दें तो जिला अस्पताल परिसर के केंद्र पर भी लिस्ट में उपलब्ध सारी दवाएं नहीं हैं। यहां बता दें कि जन औषधि केंद्रों में 800 से अधिक दवाएं और 154 सर्जिकल प्रोडक्ट रखे जाने हैं, पर जिले के जन औषधि केंद्रों में इनमें से आधी जरूरी दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रहीं। संचालक सिर्फ वही दवा मंगाते हैं जिसकी ब्रिकी ज्यादा है। आई ड्राप, हार्ट, पेट दर्द, जैसी दवाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध नहीं हैं। केंद्र संचालकों ने बताया कि ब्रिकी न होने की वजह से हमने कई दवाओं को मंगाना बंद कर दिया है। सिर्फ वही दवाएं मंगा रहे हैं जिनकी डिमांड ज्यादा है।
मुख्य वजह औषधि केंद्रों पर समय पर दवाओं की आपूर्ति न होना भी जताई जा रही है। बताया कि अभी सिर्फ लखनऊ में स्थित एक ही सेंटर से प्रदेश में दवाओं की सप्लाई की जाती है, जिस वजह से आर्डर देने के कई दिनों बाद दवा की सप्लाई आ पाती है। अगर पश्चिमी उप्र में एक सेंटर व प्रदेश में कम से कम चार और सेंटर खोल दिए जाएं तो सप्लाई समय से हो सकती है। ड्रग इंस्पेक्टर विवेक कुमार ने बताया कि करीब 20 सेंटर खोले गए थे। इसमें चार बंद हो चुके हैं।
यह दवाएं मंगाई ही नहीं जा रहीं
नेवीविबोल टैबलेट 10 एमजी (हार्ट)
ओलपेटाडीन, आई ड्राप (आंख)
इसपगुला पाउडर (पेट दर्दं)
वाल्सार्टेंन टैबलेट 80 एमजी (हार्ट)
ग्लिक्लाइजाइड
वोग्लिबोस