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ईरान समस्या से फिलहाल बाजार पर कोई असर नहीं

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विवाद बढ़ने पर हो सकती हैं आयातित सामग्री प्रभावित
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यूपी से भी होता है हस्तशिल्प और अन्य वस्तुओं का निर्यात
बरेली। ईरान में हुई उथलपुथल से बाजार पर कोई असर नहीं पड़ा है। इन दिनों चावल का सीजन है और बड़ी मात्रा में इसका निर्यात भी ईरान और उसके आसपास के देशों में होता है। अभी भले ही कोई प्रभाव नहीं दिखा है, लेकिन ज्यादा कुछ होने से बरेली समेत विभिन्न शहरों में निर्यात कारोबार प्रभावित हो सकता है। भारत मेवा, फ्रूट समेत दर्जनों आइटमों का ग्राहक है। अब तक कोई किल्लत नहीं आई है।
फिलहाल मेवा स्टॉक भरपूर, कीमतों में बदलाव नहीं
ईरान में हुए अमेरिकी हमले से वैश्विक बाजार में भले ही उथलपुथल हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर सब कुछ सामान्य है। ईरान से बड़ी मात्रा में मेवा, कॉफी, मसाले, फ्रूट, बादाम गिरी, छुआरा, केसर, पिस्ता, ग्लासवेयर, कच्चा तेल, ओरिजनल और आर्टिफिशिल रत्न आदि का आयात होता है। स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि ईरान में हो रही उथलपुथल से बाजार प्रभावित नहीं हुआ है। मेवा का स्टॉक भी भरपूर मात्रा में है। यहां बता दें कि ईरान के अलावा अन्य देशों से भी मेवा आयात होता है।
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सालाना चार लाख क्विंटल चावल जाता है ईरान-इराक
बरेली जिला में करीब साठ राइस मिलें एक्सपोर्ट चावल का उत्पादन करती हैं। बासमती आदि उच्च क्वालिटी का चावल, जिसकी रिकवरी बमुश्किल 35 प्रतिशत बताई जाती है, अकेले तीन लाख क्विंटल ईरान और एक लाख क्विंटल से ज्यादा सुगंधित चावल इराक को हर साल निर्यात होता है। चावल उत्पादक और कारोबारी बताते हैं कि करीब साढे़ चार सौ करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर इन दोनों देशों से ही हो जाता है। कारोबारी बताते हैं कि चावल निर्यात इन दिनों चल रहा है। अगर ज्यादा कोई समस्या आई तो कारोबार प्रभावित हो सकता है।
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राइस मिल 60
टर्नओवर 450 करोड़ रुपये
निर्यात 4 लाख क्विंटल

बरेली से बासमती आदि उच्च क्वालिटी का चावल और हस्तशिल्प आदि निर्यात किया जाता है। वैसे ईरान के लिए देश भर से दर्जनों आइटम निर्यात होते हैं, लेकिन अब तक कोई समस्या नहीं आई है।
- आरआर गोयल, संयुक्त आयुक्त उद्योग

अभी मेवा का स्टाक खूब है। दामों में कोई बदलाव नहीं आया है। ईरान से अगर मेवा का आयात नहीं होगा तो भी उसके कई विकल्प हैं। इसलिए बाजार यथावत ही रहेगा।
- संजय आनंद, मेवा कारोबारी
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