बरेली। बड़ी उम्मीद के साथ मंडी में दो दिन पहले लाया गया भारी भरकम अफगानी प्याज लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। देसी प्याज की मांग ज्यादा होने से इसकी कीमतों में भी पांच रुपये का उछाल आ गया है। हालांकि होटल-ढाबे वाले अफगानी प्याज को पसंद कर रहे हैं, लेकिन सलाद न बनने के चलते घरों में मांग कम होने से आढ़तियों की उम्मीदें टूटती दिख रही हैं। वहीं, मौसम साफ होते ही मंडियों में आलू की आवक बढ़ गई है। जिससे बारिश में 25-30 रुपये तक बिकने वाला आलू फिर 18-20 रुपये किलो बिकने लगा है।
थोक मंडी में अफगानी प्याज को खरीदने से ज्यादा देखने वालों की भीड़ है। आढ़ती कमर अख्तर ने बताया कि बड़े आकार और ज्यादा वजन के चलते लोग इसे घरों में सलाद या कम इस्तेमाल के लिए पसंद नहीं कर रहे हैं। लेकिन समारोह और होटल में ग्रेवी बनाने के लिए इसकी मांग हो रही है। साइज बड़ा होने के चलते होटल वालों का इससे परता खूब खा रहा है, क्योंकि इसमें छिलका बहुत कम होता है। मगर थाली में सलाद के रूप में परोसने के लिए पुराने देसी प्याज को ही पसंद किया जा रहा है। इस वजह से सोमवार को देसी प्याज की कीमत में पांच रुपये किलो तक और उछाल आ गया। थोक में 80 रुपये किलो तक इसकी बिक्री हुई। फुटकर विक्रेता इसे सौ रुपये किलो तक बेच रहे हैं। वहीं, सबसे ज्यादा मांग वाला छोटे आकार का देसी प्याज 40 रुपये किलो तक बिक रहा है।
बारिश में भीगा आलू और बेदम, 25-30 तक पहुंचा आलू अब 18-20 रुपये किलो
सोमवार भोर से ही मंडियों में नया आलू पहुंचना शुरू हो गया था। पिछले दिनों हुई बारिश के चलते खुदाई न होने से आलू की कीमतों में दस रुपये तक उछाल हो गया था। अब नया आलू फिर 18-20 रुपये किलो बिकने लगा है। थोक मंडी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शुजाउर्रहमान ने बताया कि खुदाई बढ़ने के साथ आलू की कीमतों में अभी और गिरावट होने की संभावना है।