बरेली। लघु उद्योग एवं खादी ग्रामोद्योग मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने रविवार को अफसरों निर्देश दिया कि वे जरी कारीगरों से ऐसे डिजाइन के परिधान तैयार करने को प्रोत्साहित करें जिनकी बाजार में डिमांड हो। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखा जाए कि यह जमाना आलिया भट्ट का है ललिता पवार का नहीं। मंत्री ने कारीगरों का मुनाफा बढ़ाने के लिए जरी-जरदोजी में बिचौलियों की भूमिका भी खत्म करने को कहा।
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने रविवार शाम विभागीय सभागार में समीक्षा बैठक से पहले कारीगरों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने इस दौरान कहा कि दुनिया में हर दिन फैशन बदलता है, ऐसी स्थिति में हमें भी मांग के अनुरूप बेहतर उत्पादन करना होगा। यह ध्यान रखना होगा कि यह जमाना आलिया भट्ट का है, ललिता पवार का नहीं’। समीक्षा के दौरान पीलीभीत जिले की स्थिति सबसे खराब मिली तो मंत्री ने अफसरों से।पूछा कि यह बांसुरी क्यों बजा रहे हो। एक जिला एक उत्पाद में जिले की पहचान बांसुरी से है लेकिन इसका कारोबार बमुश्किल एक करोड़ मासिक है और इससे सिर्फ दो परिवार ही जुड़े हैं। मंत्री ने किसी और कारोबार का प्रस्ताव देने को कहा। बदायूं जिले की स्थिति भी बेहतर नहीं पाई गई। में मिली। मंत्री ने दोनों जिलों के अफसरों को एक महीने के अंदर सुधार लाने की चेतावनी दी। उन्होंने कारीगरों को पहचान पत्र भी बांटे। इस दौरान मंत्री ने कारीगरों से पूछा कि सरकार सही काम कर रही है तो जवाब मिला बेहतर।
बेंत फर्नीचर को फिर मिलेगी पहचान
लद्यु उद्योग मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एक सवाल में बताया कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में अब तक सिर्फ जरी दरदोजी ही शामिल है। लखनऊ में बैठकर अफसरों ने योजना बना दी। बेंत और फर्नीचर कारोबार के लिए बरेली जिला जाना जाता है। इसलिए ओडीओपी योजना में दूसरा उत्पाद बेंत और फर्नीचर कारोबार शामिल किया जाएगा। अगले माह होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में इस पर स्वीकृति दी जाएगी। समीक्षा बैठक में संयुक्त आयुक्त आरआर गोयल ने मंडलीय जानकारी दी। मंत्री ने रेशम, खादी, हथकरघा और वस्त्रोद्योग अफसरों के कामकाज पर नाराजगी जताई। व्यापारी कल्याण बोर्ड अध्यक्ष पवन अरोरा आदि मौजूद रहे।