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नहर से नाली में तब्दील हो गई मुडिया मुंशीनगर नहर

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बरेली। शहर के कॉलोनाइजरों ने नदी और नहरों की अरबों रुपये की जमीन कब्जा कर मकान बनाए और बेच दिए। पुलिस और प्रशासन के अफसर ही नहीं आम आदमी भी इससे बखूबी वाकिफ हैं कि कहां, किस कॉलोनाइजर ने नहर की जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी बसाई है। हैरत यह कि सिंचाई विभाग के नक्शे में नहर दर्ज ही नहीं है। वह भी तब जब मौके पर नहरों के अवशेष उनके अस्तित्व की गवाही दे रहे हैं। नहर पर कब्जा करके मकान बनाने वाला भले ही आपको न बताए, लेकिन पड़ोसी नहर होने की गवाही देने को तैयार हैं।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक मुड़िया मुंशीनगर नहर के नाम से सालों पहले एक नहर भी थी। वर्ष 1965 से पहले नहर सौ फुटा रोड से गुजरती थी, लेकिन एयरफोर्स के निर्माण के दौरान इसका रास्ता पीरबहोड़ा से निकाला गया। तब यहां कॉलोनियों का अस्तित्व नहीं था, लेकिन इस स्थान परिवर्तन के बाद नहर क्षेत्र से बाहर निकल गई और फिर इसका अस्तित्व खतरे में पड़ा। पहले नहर के पास खाली पड़ी जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा किया और फिर आगे चलकर कॉलोनाइजरों के जरिए यहां प्लॉट काटे। आरोप है कि इस आपसी मिलीभगत में जमीन कब्जाने के लिए ‘सिस्टम’ का भी साथ जरूरी था। इसलिए वहां भी सांठगांठ कर पुरानी नहर को नक्शे से हटाए जाने के बाद साल 1995 में बनाए गए नए नक्शे में नहर का नामोनिशान तक मिटा दिया गया। हालांकि, स्थानीय लोगोें ने इसका विरोध भी किया, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। तमाम शिकायतों के बावजूद हुई जांच में भी कॉलोनाइजरों को क्लीनचिट दे दी गई। साल 2017 में तत्कालीन सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी इस नहर को जीवित करने की योजना बनाई जो कागजों तक ही सीमित रही।
55 फीट की नहर पांच फीट में सिमटी
लोगों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रुहेलखंड नहर डिवीजन की नहर एयरफोर्स स्टेशन के सामने पीरबहोड़ा में थी। यहां से नहर का एक हिस्सा सनसिटी, सन सिटी विस्तार, मुंशीनगर, बिहारमान नगला से होकर सौ फुटा रोड तक था। वर्तमान में मुंशीनगर और पीरबहोड़ा में ही नहर के अवशेष एक संकरी सूखी नाली के रूप में बचे हैं। कहीं-कहीं बिल्डरों ने नहर की जमीन पर सड़क भी बना दी है। पीरबहोड़ा नहर से दूसरा हिस्सा पीलीभीत बाईपास रोड की ओर से निकलकर कुसुमनगर, ग्रीन पार्क होकर बीसलपुर रोड हरूनगला तक है। हरूनगला में जिस स्थान पर नहर की टेल थी, वहां अब कॉलोनी बन चुकी है। पीलीभीत बाईपास रोड पर बजरंग ढाबे के पीछे, एक अस्पताल, तीन मैरिज लॉन से होकर नहर निकली थी। पीरबहोड़ा, तुलाशेरपुर, परतापुर जीवन सहाय, नवादा जोगियान, डोहरा, हरूनगला में नहर की जमीन पर कब्जे कर मकान बनाए गए हैं। यह सिलसिला अभी भी जारी है।
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2014 में डीएम ने कॉलोनाइजर के पक्ष में दी थी रिपोर्ट
बीसलपुर रोड स्थित एक कॉलोनाइजर के नहर पर कब्जा करने की शिकायत पर 2014 में तत्कालीन डीएम ने जांच कराई। बताया जाता है कि इस पर डीएम ने शासन को कॉलोनाइजर के पक्ष में रिपोर्ट दे दी थी। रिपोर्ट पर शिकायतकर्ताओं ने आपत्ति जताई तो क्लीनचिट मिलने पर कॉलोनाइजर और बेखौफ हो गए। डीएम की रिपोर्ट के आधार पर कॉलोनाइजर को हाईकोर्ट से राहत भी मिल चुकी है।
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