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लॉकडाउन में बगैर दवाओं के जीना सीख गया शहर

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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शुरुआत में दो से तीन गुना तक बढ़ी दवाओं की सेल और फिर एकाएक धड़ाम
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बुखार, जुकाम, खांसी, शुगर, ब्लडप्रेशर, हार्ट की बीमारियों के प्रयोग होने वाली दवाओं की सर्वाधिक बिक्री
केमिस्ट्स के मुताबिक बीमारी से ग्रसित होने की आशंका के चलते दवाओं का लोगों ने किया स्टॉक

बरेली। कोरोना की दहशत के बीच शहर में काफी-कुछ ऐसा भी घटा है जो शायद लोगों को लंबे समय तक सुकून देता रहेगा। लॉकडाउन लागू होने के बाद पहले दो हफ्तों में लोगों ने अंधाधुंध दवाएं खरीदकर रिकॉर्ड बना दिया था लेकिन एक बड़ी राहत देने वाली खबर यह है कि इसके बाद दवाओं की सेल में आश्चर्यजनक स्तर तक कमी आई है। दवा कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक पहले दौर में जिस तरह बगैर डॉक्टर के पर्चों के दवाएं खरीदने की होड़ मची हुई थी, वह लोगों का डर जाहिर कर रही थी लेकिन अब घटती मांग यह बता रही है कि शहर बगैर दवाओं के जीना सीख रहा है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जनता कर्फ्यू की घोषणा होते ही शहर के अस्पतालों के दरवाजे एक-एक कर आम मरीजों के लिए बंद होने शुरू हो गए थे। ज्यादातर अस्पतालों ने ओपीडी तक बंद करने की घोषणा कर दी, लेकिन इसके बावजूद मेडिकल स्टोरों पर करीब दो हफ्तों तक जबर्दस्त भीड़ जुटती रही। डॉक्टरों के पुराने पर्चों या फिर बगैर पर्चे के ही लोगों ने इस कदर दवाएं खरीदीं कि कई मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की शॉर्टेज तक हो गई। दवा कारोबारियों के मुताबिक इस दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के साथ एंटीबायोटिक और आयुर्वेदिक दवाओं की भी सेल दो से तीन गुना तक बढ़ी। लोगों में डर था कि कहीं दवा की दुकानें भी बंद न हो जाएं। कोरोना से बचने के लिए लोगों ने विटामिन सी, पैरासिटामॉल और जुकाम-खांसी और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की भी बगैर जरूरत बड़े पैमाने पर खरीद की। मगर दो हफ्ते गुजरते-गुजरते दवाओं की सेल का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आने लगा।

पहले दो सप्ताह में तीन गुना तक बढ़ी, अब सिर्फ 25 फीसदी सेल

बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दुर्गेश खटवानी के मुताबिक लॉकडाउन लागू होने के बाद पहले ही सप्ताह में मंडल भर में दवाओं की सेल तीन गुना तक बढ़ गई थी लेकिन अब बमुश्किल 25 फीसदी रह गई है। पहले स्थिति यह थी कि लोग मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर डॉक्टरों को फोन लगाकर दवा प्रिस्क्राइब करा रहे थे। डॉक्टर अगर सात दिन की दवा बता रहा था तो पूरे महीने की दवा मांग रहे थे। इस वजह से दवाओं की कालाबाजारी भी शुरू हो गई थी। अब पिछले डेढ़ दो हफ्ते से दवाओं की सेल बमुश्किल 25 फीसदी ही रह गई है और लगातार घटती जा रही है।

आईपीएम की रिपोर्ट: लॉकडाउन में 10 फीसदी तक बढ़ी दवा की सेल

दवा कारोबारियों का दावा- ये लॉकडाउन के पूरे तीन हफ्ते के आंकड़े
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भारतीय फार्मास्युटिकल मार्केट यानी आईपीएम ने लॉकडाउन में दवाओं की सेल में 10 प्रतिशत वृद्धि की रिपोर्ट जारी की है। आधारित रिपोर्ट के मुताबिक मूविंग एनुअल टोटल यानी मैट आधार पर ब्रांडेड और बड़ी कंपनियों की दवाओं की सेल ज्यादा हुई है। पहले लोग साल्ट के अनुसार सस्ती दवा भी खरीदते थे, इस दौरान ब्रांडेड दवा पर समझौता नहीं किया। टॉप टेन दवा कंपनियों ने सेल 15 फीसद तक वृद्धि की रिपोर्ट जारी की है। दवा कारोबारियों के मुताबिक यह रिपोर्ट अब तक के आंकड़ों पर आधारित है। अगर इसे शुरुआती दो हफ्तों और इसके बाद के दिनों में हुई सेल के आधार पर तैयार किया जाता तो अंतर साफ दिखता।

फियर सायकोसिस ने बढ़ाई दवाओं की सेल

मनोवैज्ञानिक डॉ. हेमा खन्ना के मुताबिक आमतौर पर भी करीब 25 फीसद लोग फियर सायकोसिस से ग्रसित रहते हैं। यानी इन्हें हमेशा डर रहता है कि कोई भी समस्या जो कहीं विकराल हो रही है, वह उनके परिवार को चपेट ले लेगी। लिहाजा ये लोग उससे निपटने के इंतजाम में जुट जाते हैं। लॉकडाउन में यह समस्या 80 फीसद लोगों तक पहुंची है। राशन या दवाओं की बेवजह खरीद की भी यही वजह को है।

अपनों के आजमाने के लिए भी दवा

जिला अस्पताल की मनोवैज्ञानिक खुश अदा कहती हैं कि कई लोगों में अटेंशन सीकिंग बिहैवियर होता है। वह अक्सर परिवार को आजमाने लग जाते हैं। खुद को बीमार दिखाते हैं और उम्मीद करते हैं कि परिवार, दोस्त या ऑफिस में कौन लोग उनपर ध्यान दे रहे हैं। लॉकडाउन में इसी मनोरोग की वजह से लोग बीमार न होने के बाद भी दवाएं खा रहे हैं। यह प्रवृत्ति नकारात्मक सोच से पैदा होती है।

जरूरत न होने पर भी लोगों ने काफी दवाएं खरीद डालीं। हर कोई परामर्श में बताई गई खुराक से भी ज्यादा दवा खरीदने की होड़ में जुटा हुआ था। इनकार करने पर जोर-जबरदस्ती भी कर रहे थे लेकिन अब दवा की मांग में काफी गिरावट आई है। - दुर्गेश खटवानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

बुखार, जुकाम, खांसी, शुगर, ब्लडप्रेशर और हार्ट के जो मरीज हैं, उन्होंने लॉकडाउन की शुरुआत में ही महीने भर की डोज खरीद ली। इसी से दवाओं की सेल बढ़ी जो जरूरतमंदों के लिए घातक भी साबित हो सकती थी। गनीमत है कि यह सिलसिला रुक गया है। - सतीश सेठी, सचिव बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

दवाओं की खरीद-फरोख्त में नियमों का पालन किया जा रहा है। बिना डॉक्टर के परामर्श के किसी भी रोग की दवा नहीं दी जा रही है। डॉक्टरों की ओपीडी बंद है लिहाजा इसका सीधा असर दवाओं की सेल पर भी पड़ रहा है। - विजय मूलचंदानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

ड्रग विभाग ने हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमायसिन बेचने पर लगाईं पाबंदियां

ड्रग विभाग ने सभी केमिस्ट एसोसिएशन को नोटिस जारी कर हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमायसिन जैसी दवाओं के स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड मांगा है, साथ ही निर्देश जारी किए हैं कि स्टॉक में में मौजूद इन दवाओं को बगैर डॉक्टर के परामर्श के न दिया जाए। उसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाए। केमिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक हाल ही में मांग बढ़ने के बाद मेडिकल स्टोरों पर इन दवाओं की बड़ी खेप मंगा ली गई थी लेकिन अब ड्रग कमिश्नर की ओर से मिले निर्देश के तहत इन दोनों दवाओं का स्टॉक फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। जरूरत पड़ी तो पूरा स्टॉक ड्रग विभाग को सौंप दिया जाएगा। अनुमान के मुताबिक जिले में हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की इस समय 50 हजार टेबलेट मौजूद हैं।
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