छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई॥
तरनिउ मुनि घरिनी होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई॥
भावार्थ :- जिसके छूते ही पत्थर की शिला सुंदर स्त्री हो गई (मेरी नाव तो काठ की है)। काठ पत्थर से कठोर तो होता नहीं। मेरी नाव भी मुनि की स्त्री हो जाएगी और इस प्रकार मेरी नाव उड़ जाएगी, मैं लुट जाऊँगा (अथवा रास्ता रुक जाएगा, जिससे आप पार न हो सकेंगे और मेरी रोजी मारी जाएगी) (मेरी कमाने-खाने की राह ही मारी जाएगी)॥
चौधरी मोहल्ले में चल रही रामलीला में केवट और भरत से मिलन के भावुक प्रसंगों ने मोहा दर्शकों का मन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। हे नाथ, आपके चरणों की धूल से तो पत्थर भी तर जाते हैं। यदि यह मेरी नाव पर लग गई तो मेरी नाव भी मनुष्य बन जाएगी और मेरा परिवार बेरोजगार हो जाएगा। यदि आपको नदी के पार जाना है तो आप पहले अपने चरण धाेने दीजिए... केवट द्वारा श्रीराम से किए गए संवाद सुनकर पूरा मैदान हर-हर गंगे और सियावर रामचंद्र के जयकारों से गूंज उठा।
श्री रानी महालक्ष्मीबाई रामलीला समिति की ओर से चौधरी मोहल्ले में चल रही रामलीला में बुधवार को गंगा पार की लीला और राम-भरत मिलन का मंचन किया गया। मंचन के दौरान भाजपा नेता अनिल कुमार ने श्रीराम के स्वरूप की आरती उतारी। वनवास के दौरान जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचे, तब केवट प्रसंग का मंचन किया गया। श्रीराम के कहने के बाद केवट ने राम के चरण धोए, चरणामृत को अपने माथे से लगाया और परिवार सहित उसे ग्रहण किया। फिर उसने राम, सीता, लक्ष्मण को नाव में बैठाकर गंगा पार कराई। समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने बताया कि यह भारत की एकमात्र रामलीला है, जहां चौधरी तालाब के अंदर नाव में बैठकर गंगा पार का सजीव मंचन किया जाता है। प्रेम, भक्ति और समर्पण का यह अनूठा दृश्य देखकर सभी दर्शक भावविभोर हो गए। नदी पार कराने के मंचन के बाद राम-भरत मिलन का भावुक मंचन किया गया। रामलीला का सबसे भावनात्मक क्षण राम-भरत मिलन रहा। अयोध्या से चित्रकूट पहुंचे भरत अपने भाई राम के चरणों में गिर पड़े और अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभालने के लिए आग्रह किया, लेकिन राम ने मना कर दिया।
इस दृश्य को देखकर सभी श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल में भरत-राम की जयकारे लगे। मंचन के दौरान भारद्वाज मुनि संवाद हुआ जिसमे, गंगा पार करने के बाद भगवान राम भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे, जहां मुनि ने उन्हें चित्रकूट में निवास करने का उपदेश दिया। इस दौरान उपाध्यक्ष विजय मिश्रा, शिव नारायण दीक्षित, शशिकांत गौतम, श्रेयांश वाजपेई, आदि मौजूद रहे।