मंगलवार को संदिग्ध डिप्थीरिया से पीड़ित एक छह साल के बच्चे की मौत हो गई। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चे की जांच नहीं हो सकी, इसलिए विभाग अभी मामले को हल्के में ले रहा है। लेकिन बताया जा रहा है कि बच्चे का जन्म घर पर हुआ था इसलिए उसे टीके नहीं लग सके थे। इसकी तीन अन्य बहनें भी हैं, जिनको बीमारी होने का खतरा है।
मीरगंज के परचई गांव के रहने वाले असलम के छह वर्षीय बेटे शरीफ को चार दिन पहले बुखार आया था। इसे लेकर पहले घर वाले निजी अस्पताल गए। जहां स्थिति न सुधरने पर उसे जिला अस्पताल लाए। सुबह करीब साढ़े 11 बजे उसे बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया। बच्चे का मुंह पूरी तरह से बंद हो गया था और वह कुछ निगल भी नहीं पा रहा था। डॉक्टरों ने इसकी सूचना सीएमएस डॉ. परवीन जहां को दी। उन्होंने तुरंत इसको लखनऊ रिफर करने के लिए 108 एंबुलेंस का इंतजाम भी किया। लेकिन शाम अपराह्न तीन बजे बच्चे की मौत हो गई।
- जांच नहीं हुई इसलिए बच रहा विभाग
बच्चा डिप्थीरिया से पीड़ित था इसका पता लगाने के लिए जांच होनी थी। लेकिन मौत होने से वह नहीं हो सकी। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मीकांत सक्सेना ने संदिग्ध डिप्थीरिया बताया तो उसे रिफर करने की तैयारी हुई। लेकिन अगर उसे डिप्थीरिया हुआ तो उसके परिवार के तीन अन्य बहनों व आसपास के बच्चाें में भी यह बीमारी होने का खतरा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग इससे बच रहा है।
- क्या है डिप्थीरिया
डिप्थीरिया को गलाघोटूं बीमारी कहा जाता है। इससे बचने के लिए डीपीटी का टीका लगाते हैं। टीके से छूटे बच्चाें को यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। इसके लक्षण बुखार और गले में जकड़न होती है। बोलने में दिक्कत होने के साथ बच्चे कुछ खा पी नहीं सक ते। यह संक्रामक बीमारी है।
वर्जन
बच्चे को डिप्थीरिया था इसकी कोई जांच नहीं हुई। हो सकता है कि उसे टांसिल संबंधी बीमारी हो। मुझे बच्चे की मौत की जानकारी है।
डॉ. विजय यादव, सीएमओ
डिप्थीरिया का टीका डेढ़ माह, तीन माह और पांच साल पर लगता है। यह बच्चों पर मुंह के रास्ते अटैक करता है। यह पशुआें से होने वाली बीमारी है।
डॉ. रवीश अग्रवाल, आईएमए अध्यक्ष