बरेली। गंदगी से बजबजाते खुले नाले में डूबे डेढ़ साल के मासूम की मौत का जवाब मांगने नगर निगम जा रहे लोगों को रोकने पर मंगलवार को बखेड़ा हो गया। पुलिस ने भीड़ को सुभाषनगर में खन्ना बिल्डिंग के पास रोका तो गुस्साए लोगों ने बच्चे का शव बीच सड़क पर रखकर प्रदर्शन कर दिया। पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई। इससे अंधेरी पुलिया से सुभाषनगर को जाने वाले रास्ते पर जाम लग गया। एसीएम के नाला सफाई और पीड़ित को हर संभव मदद के आश्वासन पर लोग शांत हुए।
सुभाषनगर क्षेत्र में स्थित वीर भट्टी के आगे श्याम कॉलोनी के वेंडर शंकर लाल का डेढ़ साल का बेटा अमन सोमवार को खेलते समय घर के पीछे से बह रहे नाले में गिर गया था। एक घंटे बाद उसका शव बरामद हुआ था। आसपास के लोग नाले की सफाई और स्लैब डालने की मांग को लेकर मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे नगर निगम में प्रदर्शन करने जा रहे थे। सुभाषनगर पुलिस ने उन्हें खन्ना बिल्डिंग के पास रोक लिया। इससे वे भड़क गए और सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। भीड़ के तेवर देख सीबीगंज समेत आसपास के थानों की फोर्स भी बुला ली गई। एसीएम पारस नाथ भी पहुंच गए। उन्होंने नाले की दुर्दशा को स्वीकार कर सफाई कराने और पीड़ित परिवार को मदद का आश्वासन दिया।
मां ने पैरों पर पड़कर मांगी मदद की भीख
बच्चे की मौत के बाद बदहवास मां अनीता ने मौके पर पहुंचे एसीएम के पैरों पर अपना सिर रखकर मदद की भीख मांगी। इस पर उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला।
सफाई कर्मी तो आते ही नहीं हैं
नाले के आसपास रहने वाले लोगों ने कहा कि सफाई कर्मी नाला साफ करने तो आते ही नहीं हैं। आगे रेलवे का बनाया गया अंडरपास थोड़ा ऊंचा हो जाने से रामगंगा को जाने वाला नाले के पानी का निकास भी बंद हो गया है। इससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। मोहल्ले वालों का कहना है कि वह लंबे अर्से से समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। इससे पहले भी एक बच्चा नाले में गिरकर मर चुका है।
थाने में दर्ज कराई गई इत्तेफाकिया रिपोर्ट
सुभाषनगर पुलिस ने बच्चे के नाले में डूब जाने के मामले में इत्तेफाकिया रिपोर्ट दर्ज की है। जबकि परिवार वाले नगर निगम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कह रहे थे। एसओ जेपी यादव ने बताया कि शंकर ने अपने बेटे की नाले में डूबकर मौत हो जाने की सूचना दी, तहरीर के आधार इत्तेफाकिया रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
रेलवे कर्मी की भी जा चुकी है जान
आठ दिसंबर 2005 को रेलवे कर्मचारी हाकिम सिंह की भी इसी नाले में डूबकर मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदर्शन किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मोहल्ले वालों का कहना है कि नौ जुलाई 2015 को डीएम भी नाला सफाई का आदेश कर चुके हैं, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। उनका यह भी कहना है कि कुछ भूमाफिया नहीं चाहते हैं कि नाले की सफाई हो।