इसी तरह मेले में दुकानों का बाजार भी सज गया है। इसमें घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज यहां उपलब्ध होती है। वहीं मनोरंजन के लिए जहां विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े झूले हैं, वहीं मिनी सर्कस और जादू के तमाशे लग गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम
मेले के लिए तमाम सुरक्षा व्यवस्था के भी इंतजाम किए गए हैं। एक तरफ पुलिस बल की तैनाती रहेगी,वहीं मेला मैदान पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। चौबारी मेला में सुरक्षा व यातायात व्यवस्था के मद्देनजर एसपी सिटी मानुष पारीक ने रामगंगा घाट का स्थलीय निरीक्षण किया। एसएसपी के निर्देश पर चौबारी मेला को सकुशल कराने के लिए पुलिस विभाग ने भी काफी तैयारी की है।
100वें साल में चौबारी मेले का प्रवेश
यूं तो चौबारी मेले का कोई इतिहास नहीं है, फिर भी यह काफी मशहूर मेला है। लगभग सौ साल से लग रहे इस मेले की खास बात यह है कि इसमें देसीपन बरकरार है। शहरी संस्कृति का रंग आज भी इस मेले पर नहीं चढ़ा है। यह अलग बात है कि खानपान की चीजों में कुछ नया मिलने लगा है। फिर भी मेला अपनी परंपरागत भाव को समेटे हुए है।
इस मेले के बारे में मेला कमेटी के लोगों ने बस इतना बताया कि यह मेला 1925 में शुरू हुआ था। इस तरह यह मेला अब 100वें साल में प्रवेश कर रहा है। 99 साल पहले इसकी शुरुआत राजा जगत सिंह के वंशजों ने की थी। इतना जरूर पता चला कि राजा जगत सिंह अपने शासन काल में गंगा मेला शुरू किया था जो बाद में बंद हो गया और बाद में फिर से शुरुआत हुई।
बताते हैं कि बाद में इस मेले को प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया। तब से वही इस मेले को सजा रहा है। अलबत्ता इस मेले को 11 लाख रुपये में प्रशासन ने मेला कमेटी को ठेका दे दिया है। वहीं इस इस मेले को व्यवस्थित करते हैं। इस मेले आस पास के अलावा आंवला, भमोरा, क्यारा, रामनगर, समेत आस पास के तमाम गांवों से लोग मेले में आते हैं। खरीदारी करते हैं और गंगा स्नान भी करते हैं।