पिछले साल बीएड की करीब चालीस फीसदी सीटें खाली रह गई थीं। काउंसलिंग के दौरान पांच हजार रुपये जमा करके अभ्यर्थियों ने सीट तो लॉक कीं, लेकिन पूरी फीस जमा नहीं की। सीटें खाली रहने का खामियाजा कॉलेजों को चुकाना पड़ा। इस बार ऐसा न हो इसलिए काउंसलिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। अब पांच हजार रुपये जमा करके सीट लॉक नहीं मानी जाएगी, हालांकि कुछ एक दिन के लिए अभ्यर्थियों को पूरी फीस जमा करनी की मोहलत जरूर मिल जाएगी।
पिछले साल तक नियम था कि काउंसलिंग में पांच हजार रुपये देकर सीट लॉक मानी जाती थी। प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 1.90 लाख सीटें हैं। चालीस फीसदी सीटें खाली रह गई। तमाम छात्रों ने पांच हजार रुपये जमा करने के बाद एडमिशन नहीं लिया। सीट लॉक होने के कारण विश्वविद्यालय उस पर दूसरे अभ्यर्थी की काउंसलिंग भी नहीं करा सका।
अब पांच हजार रुपये देकर कुछ दिन की मोहलत दी जाएगी। उस दौरान पूरी फीस नहीं जमा होती है तो सीट रिक्त मानकर अगले अभ्यर्थी को मौका दे दिया जाएगा। स्टेट कोआर्डिनेटर प्रोफेसर बीआर कुकरेती ने बताया कि सीटें खाली न रहें इसलिए यह कदम उठाया है।
इस बार पांच ट्रांसजेंडर देंगे बीएड प्रवेश परीक्षा
समाज में ट्रांसजेंडर को भले ही सम्मान की नजर से न देखा जाता हो, लेकिन वह अपने वजूद के लिए उच्चशिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। बीएड में भी ट्रांसजेंडर ने अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। इस बार बीएड प्रवेश परीक्षा में पांच ट्रांसजेंडर शामिल हो रहे हैं। मंगलवार तक पांच आवेदन आए थे। इसमें इजाफा भी हो सकता है। पिछले साल तक एक दो अभ्यर्थी ही ऐसे थे। दूसरी तरफ बीएड में लड़कियों का प्रतिशत भी बढ़ा है। मंगलवार तक 5,37,827 पंजीकरण हुए, जिसमें 4,69,161 ने फीस जमा की है। इसमें 45 फीसदी महिला अभ्यर्थी हैं।