एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 14 वें दीक्षांत समारोह में शनिवार को कुलाधिपति रामनाईक ने चरैवेति चरैवेति का मंत्र देते हुए कहा कि कामयाबी बैठने से हासिल नहीं हो जाती। इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी अपने मोनोग्राम के साथ चरैवेति चरैवेति के संदेश से अपने विद्यार्थियों को इसके लिए प्रेरित करता है। उन्होंने संस्कृत के एक श्लोक के जरिए समझाया। जो खड़े रहते हैं, उनका भाग्य भी खड़ा होता है। बैठने वालों को भाग्य भी बैठ जाता है और जो सोते हैं, उनका भाग्य भी सो जाता है इसलिए सफलता और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार चलते रहो। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम का संदेश भी विद्यार्थियों को सुनाया कि सपने रात को मत देखो, दिन को देखो। जागते हुए देखे गए सपने कभी सोने नहीं देते हैं।
कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह में अपनी कक्षाओं में सर्वोत्तम अंक पाने वाले 86 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान करके सम्मानित किया। इन विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आज स्पर्धा बढ़ रही है इसलिए खुद को साबित करने के लिए ज्यादा संघर्ष की आवश्यकता है। जो विषय हाथ में लो, गहराई से उसके बारे में अध्ययन करो। जो काम करो, पूरी तरह से दिल लगाकर करो, कभी नाकामयाब नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश के 26 में से 21 राज्य विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में उन्होंने अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही गाउन पहनने की परंपरा को हटवाकर भारतीय ड्रेस पहनने की व्यवस्था लागू कराई है। प्रदेश के सारे विश्वविद्यालयों में अब समय से परीक्षाएं हो रही हैं। समय पर रिजल्ट आ रहा है। बोले- विश्वविद्यालयों के सामने यह चुनौती है कि वे शिक्षा को शोध की दिशा में ले जाएं।
कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने अतिथियों का स्वागत किया। कुलसचिव डॉ. साहबलाल मौर्य ने आभार जताया। संचालन प्रो. नीलिमा गुप्ता ने किया। प्रतिकुलपति प्रो. वीपी सिंह, प्रो. एके सिन्हा, प्रो. एके जेटली, प्रो. श्यामबिहारी लाल, प्रो. एके सरकार, प्रो. अभय कुमार सिंह, प्रो. बीआर कुकरेती, प्रो. एके सिंह, डॉ. अनीता त्यागी, डॉ. निवेदिता श्रीवास्तव, डॉ. विजय बहादुर सिंह यादव आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। समारोह में 198 पीएचडी उपाधि भी प्रदान की गईं।
लड़कियों की बराबरी करो
दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले 86 विद्यार्थियों में 64 लड़कियां थीं और 22 लड़के। कुलाधिपति रामनाईक ने इस पर चुटकी ली। लड़कों से कहा कि यहां 74 फीसदी लड़कियों ने गोल्ड मेडल हासिल किए हैं सिर्फ 26 फीसदी ही लड़के हैं। इसलिए अब लड़कों को लड़कियों की बराबरी करने की कोशिश करनी चाहिए। ज्यादा नहीं तो 50 फीसदी पर आने की कोशिश करें।