बाढ़ के बीच गुजरे थे गोपाल बाबा
चालीसा पूर्ण कर शिवभक्त गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर जाते हैं। धोपेश्वरनाथ मंदिर के महंत शिवानंद गिरि ने बताया कि जहां आज गोपाल सिद्ध बाबा का मंदिर है, वहां से कभी रामगंगा नदी गुजरती थी। वह प्रतिदिन धोपेश्वर नाथ मंदिर में रामगंगा के जल से अभिषेक करने के लिए आते थे। एक दिन जब वह रामगंगा में डुबकी लगाने के बाद बाहर आए तो बाढ़ आ गई थी। वह सावन का ही महीना था।
वह बाढ़ के बीच ही मंदिर के लिए निकल पड़े। जब उन्होंने धोपेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया तो उनका शिव से साक्षात्कार हुआ। तब भोलेनाथ ने आशीर्वाद दिया कि जब भी सावन में भक्त मेरी पूजा करेंगे, तब उनकी मनोकामनाएं तुम्हारे द्वार पर आकर ही पूरी होंगी। आज भी सावन का अंतिम सोमवार गोपाल सिद्ध बाबा को समर्पित माना जाता है।
27 साल से सेवा कर रही व्यापार मंडल चालीसा कमेटी
धोपेश्वर नाथ मंदिर में सेवा करने के लिए व्यापार मंडल चालीसा कमेटी बनाई गई है। संयोजक राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि कमेटी 27 वर्षों से चालीसा करती आ रही है। इस बार इसमें 12 सदस्य हैं। अंतिम सोमवार को गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद ही अनुष्ठान संपन्न होता है।
गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर के महंत नारायण गिरि ने बताया कि गुरुजनों से हमने यहां की अद्भुत कथा का श्रवण किया है। बाबा श्री धोपेश्वर नाथ की कृपा से ही बाबा गोपाल सिद्ध हुए। सावन का अंतिम सोमवार यहां के लिए समर्पित है। बाबा के भक्त दूर-दूर से आकर यहां अपना चालीसा पूर्ण करते हैं।
राम वाटिका के रमेश चंद्र जायसवाल ने कहा कि 79 वर्षों से चालीसा करता आ रहा हूं। बचपन में जब हमारे बुजुर्ग चालीसा करने जाते थे तो मैं साथ हो लेता था। बाबा की कृपा हमारे परिवार पर बनी हुई है।