बरेली। बदायूं और बरेली सीमा के तमाम किसानों की नैय्या रामगंगा की धार में फंस गई है। फरीदपुर के सीमावर्ती गांव नगरिया कलां और बदायूं के दातागंज तहसील के तमाम किसानों की जमीन नदी कटान में बह रही है। इसलिए दोनों जिलों का सीमांकन भी तहस-नहस हो रहा है। अफसरों का कहना है, नगरिया कलां में काफी समय से चकबंदी चल रही है। इसलिए प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए सिरे से पैमाइश हो सकती है। चकबंदी अधिकारी अभी कम से कम तीन महीने का और वक्त लगने की संभावना जता रहे हैं। इसे लेकर एडिशनल कमिश्नर ने दोनों एसडीएम को नोटिस जारी कर दिया है।
पीड़ित किसानों की शिकायत के बाद इस मामले को दातागंज के विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू ने उठाया था। इस मामले में दातागंज के एसडीएम ने जुलाई में यह रिपोर्ट दी थी कि ग्राम वछिलिया खाम की अधिकतर भूमि रामगंगा के कटान में हैं। इससे दातागंज की ओर से न कोई चक का निशान है और न ही कोई सीमा स्तंभ है। इसलिए फरीदपुर की ओर से पैमाइश करने की सहमति दोनों जिलों की संयुक्त टीम के बीच हुई है। वर्ष 2015 में भी इसी तरह का विवाद पैदा होने हुआ था। उस वक्त नगरियाकलां के कई पट्टेदारों को करीब 500 मीटर दूर ग्राम वछिलिया खाम में कब्जा करा दिया गया था, जबकि एसडीएम फरीदपुर ने कमिश्नर को यह रिपोर्ट दी है कि रामगंगा के बहाव से सीमा विवाद पैदा हो गया है। चूंकि नगरिया कलां गांव अभी चकबंदी में है। इसलिए चकबंदी अधिकारी ने यह रिपोर्ट दी है कि 50 फीसदी सर्वे हुआ है। बाकी के लिए अभी तीन माह और लगेंगे। दोनों एसडीएम की रिपोर्ट के बाद अपर आयुक्त अरुण कुमार ने इस पर नाराजगी जाहिर की है कि दोनों जिलों की टीमों ने अब तक सीमा का सर्वे ही नहीं किया है। नगरिया कलां में तीन महीने का और समय लगने की रिपोर्ट से स्पष्ट हैं कि चकबंदी जल्द पूरा करने में तेजी नहीं दिखाई जा रही। इस मामले में अपर आयुक्त नेे फरीदपुर और दातागंज दोनों तहसीलों के एसडीएम को सर्वे कर 45 दिनों के अंदर प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए है।
नगरिया कलां में चकबंदी के बाद ही दोनों जिलों की सीमा की पैमाइश की जाएगी। इसका सर्वे किया जा चुका है। इस संबंध चकबंदी अधिकारियों को भी जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
-एके सिंह, एसडीएम फरीदपुर