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सिजेरियन से नार्मल होने लगीं डिलीवरी, सिजेरियन में 80 फीसदी तक की गिरावट

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Corona - फोटो : Twitter
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संक्रमण की आशंका से गर्भवती महिलाओं को जिला महिला अस्पताल किया जा रहा रेफर
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रिकॉर्ड के मुताबिक छह जून को मंडल में 222 प्रसव हुए, इसमें 211 नार्मल और मात्र 11 सिजेरियन हुए

बरेली। दुनिया भर के लिए रहस्य बने कोरोना वायरस ने न सिर्फ लोगों की आदतों को बदला बल्कि इसकी दहशत ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को भी काफी हद तक राहत पहुंचाई है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब गायनोकोलॉजिस्ट सिजेरियन के बजाय नॉर्मल डिलीवरी की ओर ज्यादा जोर दे रही हैं। तमाम ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसमें पहले सिजेरियन डिलीवरी का जोर दिया गया मगर, बाद में नॉर्मल डिलीवरी कर दी। मंडल भर से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो अफसर इसे गर्भवतियों के लिए सुखद पहलू मान रहे हैं।
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दरअसल, लॉकडाउन के दौरान गर्भवती महिलाओं के इलाज में आनाकानी से गर्भवती की जान पर बन आने के तमाम मामले पिछले दिनों सामने आए। जिसमें संक्रमण की आशंका के चलते निजी अस्पतालों में चल रहे गर्भवती के इलाज के बावजूद प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें भर्ती नहीं किया गया। वहीं, कई ऐसे मामले भी सामने आए जब गर्भवती के परिजनों से हाथोंहाथ रुपए जमा कराने के बाद ही उन्हें भर्ती किया गया। मगर, इन सब घटनाओं के बीच दूसरी ओर, तमाम अस्पतालों ने फजीहत होने के खौफ से उन गर्भवती महिलाओं को जिन्हें पहले हर हाल में सिजेरियन से ही डिलीवरी होने के बाबत चेताया गया था, बाद में उनकी नॉर्मल डिलीवरी कराई। ऐसे में एडी हेल्थ कार्यालय पहुंच रहे सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो छह जून को मिली रिपोर्ट में 222 डिलीवरी हुई। इसमें से 211 नॉर्मल और महज 11 ही सिजेरियन डिलीवरी हुई है। अफसरों का कहना है कि सिजेरियन के दौरान संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में जहां तक संभव हो रहा है अस्पतालों में नॉर्मल डिलीवरी ही कराई जा रही है।

संक्रमण का खौफ: जिला महिला अस्पताल कर रहे रेफर

कोरोना काल के दौर में सिजेरियन प्रसव में आई कमी के साथ ही एक और मामला भी सामने आ रहा है। तमाम निजी अस्पताल गर्भवती की डिलीवरी कराने के बजाय उन्हें जिला महिला अस्पताल रेफर कर रहे हैं। जिस पर पिछले दिनों महिला अस्पताल की सीएमएस ने भी आपत्ति जताते हुए सीएमओ को संबंधित अस्पतालों के खिलाफ एक्शन लिए जाने के बाबत पत्र भी लिखा था। दूसरी ओर, गायनोकोलॉजिस्ट का तर्क है कि अस्पताल में सैंपलिंग आदि की सुविधा नहीं है। ऐसे में किसी गर्भवती में कोरोना के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर उन्हें जांच कराने को कहा जा रहा है। इसलिए वह महिला अस्पताल जा रही हैं।

20 से 50 हजार तक है सिजेरियन प्रसव का खर्च

जानकारी के मुताबिक निजी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी कराने पर आमतौर पर 20 से 30 हजार रुपए लगते हैं। वहीं, गर्भवती की हालत गंभीर होने पर जांच आदि के बाबत 50 हजार रुपए तक भी खर्च हो जाते हैं। वहीं, नॉर्मल डिलीवरी पर 6 से 10 हजार रुपए ही खर्च होते हैं। दूसरी ओर, सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन हो या नॉर्मल डिलीवरी वह पूरी तरह मुफ्त होती है। साथ ही, गर्भवती के खान-पान के लिए शासन से आर्थिक मदद भी मिलती है।

डिलीवरी न कराने पर गर्भवती की हो चुकी है मौत

पिछले दिनों सुर्खा छावनी निवासी एक गर्भवती का केस बिगड़ने पर निजी अस्पताल ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया था। परिजन उसे लेकर एक से दूसरे अस्पताल का चक्कर काटते रहे मगर किसी ने भी उसे भर्ती नहीं किया। दो दिन तक चली दौड़भाग के बाद एक अस्पताल से वापस लौटते हुए गर्भवती ने दम तोड़ दिया। वहीं, एक अन्य मामले में बिहारीपुर के दंपती को डिलीवरी कराने के लिए नगद 35 हजार के बाद कोरोना जांच के लिए अलग से पांच हजार रुपए मांगे गए। जिसे न देने पर बच्चे का चेहरा पिता तक को देखने नहीं देने की अमानवीय हरकत अस्पताल ने की थी।

बेहद जरूरी होने पर ही बुलाया जा रहा अस्पताल

गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. अनीता छाबडिया का कहना है कि उनके अस्पताल में सिजेरियन और नॉर्मल दोनों ही तरह की डिलीवरी हो रही है। गर्भवती की स्थिति और बच्चे के मूवमेंट को देखते हुए निर्णय लिया जाता है। बताया कि अब वह गर्भवती को बेहद जरूरी होने पर ही क्लिनिक में बुला रही हैं ताकि गर्भवती के अस्पताल आने जाने के दौरान कोई संक्रमण का खतरा न रहे। वहीं, गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. नीलू का कहना है कि गर्भवती हॉटस्पॉट से है या उसमें कोरोना के संदिग्ध लक्षण दिखते हैं तो कोरोना की जांच का सुझाव दिया जाता है। बताया कि नॉर्मल हो या सिजेरियन डिलीवरी के दौरान इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल के मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है।

लॉकडाउन के चलते नहीं हो पा रहा टीकाकरण

लॉकडाउनहोने की वजह से बच्चों को किए जाने वाले टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। कई माता पिता अस्पताल तक बच्चों को लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो दूसरी ओर, एएनएम, आशा वर्कर भी संक्रमण की आशंका के बाबत हर घर नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों को देखते हुए बीते माह में शासन ने फिर से टीकाकरण अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं मगर अभी भी लक्ष्य आधे से कम ही पूरा हो सका है।

मंडल भर से मिल रही रिपोर्ट में सिजेरियन डिलीवरी के बजाय सामान्य प्रसव की संख्या अधिक है। नॉर्मल हो या सिजेरियन प्रसव दोनों में ही डॉक्टरों को संक्रमण से बचाव के दिए गए निर्देश पूरी तरह फॉलो करने को कहा गया है। संदिग्ध मिलने पर सैंपल की जांच करानी भी जरूरी है। - डॉ. राकेश दुबे, अपर निदेशक स्वास्थ्य।

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