बरेली। सड़क की गुणवत्ता पांच साल सुनिश्चित कराने के शासन व सरकार के निर्देशों का शहर में खुला मखौल उड़ रहा है। सिटी रेलवे स्टेशन के सामने बनी पीडब्ल्यूडी की सीमेंट, कंक्रीट से बनी सीसी सड़क दो साल से भी कम अवधि में ही उखड़ने लगी है। इंजीनियरिंग पर सवाल उठ रहे हैं। गुणवत्ता जांच के घेरे में है। यह उस सड़क का हाल है, जिससे हर रोज बीस हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सिटी रेलवे स्टेशन के सामने जलभराव से हर साल सड़क टूट जाती थी। इसीलिए वर्ष 2022 में डामर रोड के स्थान पर सीसी सड़क प्रस्तावित की गई। एक करोड़ रुपये से अधिक बजट खर्च करके सड़क निर्माण वर्ष 2023 में पूरा हुआ, लेकिन सड़क दो साल भी नहीं चल सकी। इसके कुछ हिस्से उखड़ने लगे हैं। नियमानुसार निर्माण के बाद इतनी कम अवधि में सड़क उखड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है, लेकिन जिम्मेदार अभियंताओं ने गौर नहीं किया। इधर, यह मामला मुख्य अभियंता अजय कुमार ने संज्ञान में आया तो उन्होंने प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मानक नहीं हुए पूरे, इसलिए टूट रही
विभाग से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि शहरी क्षेत्र में जहां बीस हजार से अधिक वाहन गुजरते हों, वहां सीसी सड़क की मोटाई तीस सेंटीमीटर से कम नहीं होनी चाहिए, लेकिन सिटी स्टेशन के सामने मात्र 19 सेंटीमीटर ही मोटाई रखी गई। मोटाई कम होने को लेकर निर्माण शुरू होने से पहले मंथन हुआ था, लेकिन अमल नहीं हुआ। अब बढ़ते ट्रैफिक के दबाव में सड़क उखड़ रही है।
अगर बढ़ते ट्रैफिक के हिसाब से सड़क डिजाइन की गई होती तो यह हाल नहीं होता। ये जांच का विषय है कि सड़क की मोटाई ट्रैैफिक की जरूरत को ध्यान रखकर तय हुई है या नहीं। दूसरा मुद्दा सीमेंट, पत्थर की रोड़ी और रेता के अनुपात का है। एस्टीमेट को सामने रखकर जांच कराई जाए ताकि हकीकत सामने आए। यह भी देखा जाए कि सड़क पर ढाल है या नहीं। कम से कम दस साल तो सड़क उखड़नी ही नहीं चाहिए थी। - रामबाबू गुप्ता, सेवानिवृत्त अभियंता
अमर उजाला ब्यूरो