मीट फैक्टरी प्रबंधन भी शक के दायरे में
जिन डेयरी मालिक के पशु बताए जा रहे हैं, उन हाजी शकील कुरैशी की मारिया फ्रोजन मीट कंपनी भी कैंट इलाके में है। यहां काले पशुओं का रोस्टर के हिसाब से कटान होकर मीट एक्सपोर्ट किया जाता है। ऐसे में उनकी डेयरी में गोवंशीय पशुओं की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पशुओं को जलभराव से बचाने के लिए शिफ्ट करने का तर्क समझ आता है लेकिन उन्हें ठूंसकर ले जाने और सफेद पशुओं को वाहन के बीच में मुंह व पैर बांधकर डालने से फैक्टरी प्रबंधन भी संदेह के दायरे में आ गया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
सीओ हाईवे देवेश सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर फतेहगंज पश्चिमी थाने के प्रभारी निरीक्षक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों ट्रकों को कब्जे में लेकर चालकों से पूछताछ शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने चालकों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। वैसे चालकों ने बरसात की वजह से पशुओं को एक डेयरी से दूसरी में शिफ्ट करने की सफाई दी है, जांच में कोई खामी मिली तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फैक्टरी प्रबंधन ने दी सफाई
मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी के प्रबंधन से जुड़े ईशान ने बताया कि धंतिया के पास उनकी डेयरी निचले इलाके में है। यहां जलभराव हो गया तो पशुओं को समस्या हो गई, तब उन्हें दूसरी डेयरी में ले जाया जा रहा था। इनमें भैंसों के अलावा गाय, घोड़े व अन्य तरीके के पशु भी शामिल हैं जो धीरे धीरे शिफ्ट किए जा रहे हैं।