बरेली। एक जुलाई के बाद दर्ज पुरानी घटनाओं के मुकदमों की विवेचना नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत होगी। मतलब साफ है कि एक जुलाई के बाद पुलिस को सारी विवेचनाएं नए कानून के तहत ही करनी होंगी।
बीएनएस लागू होने के बाद सभी मुकदमे इसी कानून के तहत दर्ज किए जा रहे हैं। 30 जून से पहले की घटनाओं की रिपोर्ट पुराने कानून के तहत दर्ज की जा रही है, लेकिन ऐसे मुकदमों की विवेचना बीएनएस के तहत होगी। सहायक अभियोजन अधिकारी सत्येंद्र प्रताप मौर्य ने बताया कि 30 जून के बाद दर्ज होने वाले सभी मुकदमों की विवेचना नए कानून के तहत ही होगी। इससे पहले दर्ज मुकदमों की विवेचना पुराने कानून के तहत ही होगी।
पीलीभीत बाइपास पर 22 जून को फायरिंग के मामले में पुलिस ने एक व दो जुलाई को मुठभेड़ में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनसे तमंचा बरामद हुआ था। इंस्पेक्टर इज्जतनगर राधेश्याम ने बताया चूंकि आरोपी पुराने मुकदमे में वांछित थे। इसलिए मुठभेड़ के मामले की विवेचना पुराने कानून के तहत ही होगी। अमूमन पुलिस मुठभेड़ के मुकदमों में नया क्राइम नंबर डालकर अलग मुकदमा दर्ज कर अलग से विवेचना करती थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल भटनागर ने बताया कि पुलिस रिमांड को लेकर लोगों में भ्रम है। रिमांड अभी भी 15 दिन की है। पहले यह होता था कि गिरफ्तारी के बाद 15 दिन की रिमांड पर आरोपी बीमारी का बहाना बनाकर भर्ती हो जाता था। 15 दिन बीतने पर उससे पूछताछ नहीं हो पाती थी। नए कानून के तहत रिमांड अब भी 15 दिन की है, लेकिन इसे टुकड़ों में 60 दिन के भीतर अलग-अलग लिया जा सकता है।