सांड़ को देखते लोग। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
नगर निगम सब्जी मंडी में कैद सांड की मौत का मामला
बरेली। जिस हट्टे-कट्टे सांड़ ने रस्सियां और लोहे की जंजीरें तोड़ दीं थीं, आखिर उसने चंद घंटों में ही कैसे दम तोड़ दिया? यह सवाल उठाते हुए मंगलवार को पीएफए (पीपुल्स फॉर एनिमल्स) के पदाधिकारियों ने डीएम नितीश कुमार को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की। साथ ही, नगर निगम के अफसरों की संवेदनहीनता और नियमों को दरकिनार कर बगैर पोस्टमार्टम कराए सांड़ के शव को दफनाने का मामला भी उठाया। इस पर डीएम ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराने का आश्वासन दिया है।
रविवार सुबह नगर निगम के सामने स्थित सब्जी मंडी में घंटों उत्पात मचाने वाले सांड़ को घेराबंदी कर पकड़ लिया गया था। सांड़ को जंजीराें से बांधा गया। इसके बाद लोगों ने नगर निगम के अफसरों को कॉल की लेकिन उन्होंने सांड़ को पशु आश्रय गृह में शिफ्ट करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। सोमवार सुबह जब मंडी खुली तो सांड़ मरा मिला। सूचना पर नगर निगम के अफसरों ने मामले पर पर्दा डालने के लिए शव को सीबीगंज ले जाकर बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफन करा दिया। पीएफए की ओर से डीएम को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि योगी सरकार के निर्देशानुसार मृतक गौवंश को पोस्टमार्टम कराने के बाद ही दफनाया जाना चाहिए, लेकिन अफसरों ने नियमों को दरकिनार कर सांड़ की मौत की वजह जाने बगैर उसे दफना दिया। पीएफए के रेस्क्यू प्रभारी धीरज पाठक ने कहा कि महज उत्पात मचाने पर सांड़ को मार देने के मामले में अफसरों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। इस पर डीएम ने मामले की जांच कराने और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन टीम को दिया है।