धौरा जलाशय की जमीन पर दबंगों द्वारा बस्ती बसा दिए जाने के मामले में विधायक छत्रपाल सिंह ने गुरुवार सुबह अमर उजाला की कटिंग के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को शिकायती पत्र भेजा। मुख्यमंत्री ने दोपहर को विधायक को फोन कर पूरा मामला जाना। आश्वासन दिया कि कमिश्नर और डीएम से जांच कराएंगे। मुख्यमंत्री ने विधायक को पूरी पत्रावली और जानकारी के साथ लखनऊ बुलाया है। सिंचाई मंत्री ने भी कार्रवाई की बात कही। इधर, मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचने के बाद सिंचाई विभाग के अफसरों की गर्दन फंसना तय माना जा रहा है।
कनमन गांव के किसान नेपाल सिंह ने कुछ दिन पहले कमिश्नर से धौरा जलाशय की जमीनों पर कब्जे होने की शिकायत की थी। कमिश्नर ने इसकी जांच एडीएम राजस्व को सौंपी थी। सिंचाई विभाग के अफसरों ने इस जांच रिपोर्ट को ही दबा कर रख दिया था। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल शुरू की तो कब्जे के इस खेल में उत्तराखंड के नेताओं और यूपी के सिंचाई विभाग के अफसरों की मिलीभगत उजागर हुई।
विधायक छत्रपाल सिंह ने मुख्यमंत्री की मेल पर एक शिकायती पत्र भेजा, जिसमें धौरा जलाशय की जमीनों पर अवैध कब्जे कराए जाने, कब्जेदारों द्वारा जलाशय में पटान कर पक्के और कच्चे मकान बनाने, बस्ती न डूबे इसलिए जलाशय को उसकी क्षमता के अनुसार नहीं भरे जाने, मछलियों की बिक्री कर लाखों रुपयों के खेल के चलते जलाशय का पानी दिसंबर व जनवरी के प्रथम सप्ताह में छोड़ देने समेत इस पूरे खेल में सिंचाई विभाग के अफसरों का हाथ होना बताया। पत्र के साथ अमर उजाला में प्रकाशित समाचार की कटिंग भी भेजी। दोपहर बाद मुख्यमंत्री ने विधायक छत्रपाल सिंह से दूरभाष पर वार्ता कर पूरा मामला विस्तार से जाना। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह कमिश्नर व डीएम को शामिल कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएंगे। जांच के बाद लापरवाह अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। भले ही जलाशय उत्तराखंड में बना है, परंतु देखरेख यूपी सरकार के जिम्मे है। इसमें खर्च होने वाले प्रतिवर्ष के बजट और मौके पर हुए कार्यों की जांच भी होगी। जिन लोगों ने कब्जे कर मकान बनाए हैं, खेती कर रहे हैं और जिनके इशारे पर कब्जे हुए हैं, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जांच के साथ होगी कार्रवाई
विधायक को सिंचाई मंत्री ने आश्वासन दिया कि जांच और कार्रवाई साथ-साथ होगी। जब धौरा जलाशय पर कब्जे हो रहे थे तो सिंचाई विभाग के अफसरों ने मुकदमे कायम कर कार्रवाई क्यों नही की, इसके लिए उत्तराखंड सरकार से भी मदद लेना चाहिए थी। अब कब्जा मुक्त कराने के लिए यूपी के साथ उत्तराखंड सरकार से फोर्स मुहैया कराने पर बात की जाएगी। कब्जेदारों के निर्माण भी ध्वस्त किए जाएंगे। जलाशय में उसकी क्षमता व मानक के अनुसार पानी स्टोरेज किया जाएगा।
बहेड़ी तहसील की 4856 हेक्टेयर भूमि को मिलता है पानी
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बहेड़ी तहसील की करीब 4856 हेक्टेयर जमीन को धौरा जलाशय से पानी मिलता है लेकिन करीब दस वर्षों से हालात इतने बदतर हो गए हैं कि क्षेत्र की नहरों, माइनारों में सिंचाई के समय यानी मई व जून में पानी ही नहीं आता है। इससे परेशान किसान जब शिकायत करते हैं तो सिंचाई विभाग बताता है कि वर्षा कम होने से पानी का स्टोरेज नहीं हो रहा है।
सपा शासन में दबा दी गई थी जांच
सपा शासन में क्षेत्र के किसान जैल सिंह, रवि ढाका, राजेंद्र सिंह, मुर्करम अली खां और नेपाल सिंह आदि ने धौरा जलाशय की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की थी। सीएम ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन सिंचाई विभाग के अफसरों ने जिले के एक नेता से पैरवी कराकर जांच रिपोर्ट को जिले में ही दबाकर रख दिया था।
एसडीओ ने कहा- लंबी प्रकिया है
धौरा जलाशय पर कब्जा करने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। पहले लिस्ट बनेगी, फिर मुकदमे होंगे। उसके बाद देखा जाएगा कि अवैध निर्माण कैसे हटाया जाए। यह लंबी प्रक्रिया है।
-राजीव कुमार, एसडीओ, धौरा जलाशय
जिलेदार बोले- ये लिस्ट तो हर बार बनती है
धौरा जलाशय के जिलेदार ठाकुर दास बताते हैं कि लिस्ट बनाने की प्रक्रिया तो इससे पहले भी कई बार हो चुकी है। कभी लिस्ट पूरी बन ही नहीं पाती है। क्या कब्जेदार अपना नाम पता सही बता देगा और फिर अकेला जिलेदार व टंडेल उनसे कैसे भिडे़गा। मौके पर अधिकारी पहुंचें, तत्काल लिस्ट बनाकर उत्तराखंड पुलिस के सहयोग से मुकदमे हों और तुरंत अवैध निर्माण ढहाया जाए, तब कुछ हो पाएगा। वो लोग बडे़ खतरनाक हैं।